ब्रेकिंग न्यूज़

Indian Railway Jobs : सरकारी नौकरी का बड़ा मौका! रेलवे में 6565 पदों पर बंपर भर्ती, मौका हाथ से गया तो पछताओगे! Bihar Weather : बिहार में 5 अप्रैल से मौसम का बड़ा बदलाव! 7-8 अप्रैल को तेज आंधी-बारिश का अलर्ट, जानें अपने जिले का हाल हॉस्पिटल बंद करो..डॉक्टर यहां नहीं रहता है, युवक की मौत से गुस्साए परिजनों ने किया हंगामा छपरा में हथियार तस्करी गिरोह का पर्दाफाश, STF ने 5 तस्करों को दबोचा ‎उच्च न्यायालय का आदेश भी नहीं मान रहा पटना आईआईटी, सैकड़ों स्कूली बच्चों का भविष्य दांव पर लगा: देव ज्योति कौन होगा बिहार का नया सीएम? मीडिया के इस सवाल पर बोले आनंद मोहन, कहा..BJP में पर्ची से तय होता है नाम बेगूसराय में विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई: 12 हजार घूस लेते आपूर्ति पदाधिकारी और डीलर गिरफ्तार घूसखोर ESI की गिरफ्तारी का विरोध: परिवहन विभाग के कर्मचारियों ने किया काम-काज ठप चिराग के सामने नरम पड़े पारस, करने लगे पार्टी और परिवार को एक करने की मांग, कहा..भतीजा CM बनें तो खुशी होगी नीतीश के गृह क्षेत्र नालंदा का मामला पप्पू यादव ने लोकसभा में उठाया, कहा..दोषियों को मिले फांसी की सजा

Home / bihar / Patna High Court News: ‘दो वयस्कों के बीच सहमति से संबंध बलात्कार नहीं’,...

Patna High Court News: ‘दो वयस्कों के बीच सहमति से संबंध बलात्कार नहीं’, पटना हाईकोर्ट का अहम फैसला

Patna High Court News: पटना हाईकोर्ट ने कहा कि दो वयस्कों के बीच सहमति से बने संबंध को बलात्कार नहीं माना जा सकता। धारा 376 के तहत दर्ज मामला निराधार पाया गया।

21-Jan-2026 08:06 AM

By FIRST BIHAR

Patna High Court News: पटना हाईकोर्ट ने मंगलवार को दुष्कर्म से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि दो वयस्कों के बीच सहमति से बने संबंध को बलात्कार का अपराध नहीं माना जा सकता। 


न्यायाधीश सोनी श्रीवास्तव की एकलपीठ ने धारा 376 के तहत दर्ज मामले को निराधार करार दिया और भागलपुर के अपर सत्र न्यायाधीश के आदेश को भी रद्द कर दिया। यह फैसला मोहम्मद सैफ अंसारी की ओर से दायर अर्जी पर सुनाया गया।


मामले में आरोप था कि अभियुक्त ने विवाह का झांसा देकर एक वर्ष तक पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए। वहीं, अभियुक्त का कहना था कि दोनों बालिग थे और संबंध पूरी तरह सहमति से बने थे। हाईकोर्ट ने कहा कि झूठा वादा और विवाह न हो पाना दो अलग बातें हैं। यदि परिस्थितियों के कारण विवाह नहीं हुआ, तो केवल इस आधार पर दुष्कर्म का अपराध नहीं बनता।


हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सहमति से बने संबंध विफल होने पर उसे आपराधिक रंग देना गैरकानूनी है। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णयों का भी हवाला देते हुए कहा कि आपराधिक मुकदमा दर्ज करते समय निचली अदालतों को केवल औपचारिक रूप से काम नहीं करना चाहिए। यदि सबूतों का अभाव है तो आरोपी को बरी किया जाना चाहिए।