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Bihar News: बिहार में यहां पाए जाते हैं 45 तरह के सांप, वैज्ञानिकों तक के लिए दुर्लभ है यह जगह

Bihar News: बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पाए जाते हैं 45 से अधिक प्रजातियों के सांप। जिसमें दुर्लभ वन सुंदरी और घातक रसल वाइपर तक हैं शामिल। इनके अलावा यहां हैं और कौन-कौन से खतरनाक सांप? जानिए..

11-Jun-2025 02:09 PM

By First Bihar

Bihar News: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व सांपों की दुनिया का एक अनोखा गढ़ है। यहां 45 से अधिक प्रजातियों के सांप पाए जाते हैं, जिनमें दुनिया के सबसे दुर्लभ और खतरनाक सांप शामिल हैं। इनमें वन सुंदरी, कोरल रेड कुकरी, ट्विन स्पॉटेड वुल्फ स्नेक, मॉक वाइपर, लॉन्ग स्नाउटेड वाइन स्नेक और सालाजार पिट वाइपर जैसे दुर्लभ सांप प्रमुख हैं। इसके अलावा रसल वाइपर जैसे हीमोटॉक्सिन वेनम वाले सांप भी यहां मौजूद हैं, जिनका दंश बेहद दर्दनाक और जानलेवा होता है। यह जहर खून को जमा देता है और मांस को सड़ाता है, जिससे पीड़ित को असहनीय पीड़ा झेलनी होती है।


VTR में गैर-विषैले सांपों की भी कई प्रजातियां पाई जाती हैं, जैसे रैट स्नेक, बफ कील बैक, चेकर्ड कील बैक, ग्रीन कील बैक, ब्रह्मणी वॉर्म स्नेक, कॉमन कुकरी और ब्रॉन्ज बैक स्नेक। बोआ परिवार के कॉमन सैंड बोआ और रेड सैंड बोआ, साथ ही पायथन परिवार के बर्मीज पायथन और इंडियन रॉक पायथन भी यहां पाए जाते हैं। इन सांपों की खासियत है कि ये कुंडली मारकर शिकार पकड़ते हैं। लॉन्ग स्नाउटेड वाइन स्नेक भारत में केवल बिहार के VTR और मेघालय में ही देखा गया है, जो इसे अत्यंत दुर्लभ बनाता है। हाल ही में VTR के पास इस प्रजाति की खोज ने वैज्ञानिकों का ध्यान खूब आकर्षित किया है।


केवल यही नहीं वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में दुनिया का सबसे लंबा विषैला सांप, किंग कोबरा भी पाया जाता है, जिसकी लंबाई 18 फीट तक हो सकती है। यह सांप अन्य सांपों को खाता है और एक बार में 20 मिलीलीटर तक जहर छोड़ सकता है। यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत शेड्यूल-वन में शामिल है। इसके अलावा, स्पेक्टिकल्ड कोबरा, जिसे स्थानीय भाषा में गेहूंवन कहते हैं, यहां आम है। इसकी न्यूरोटॉक्सिन जहर 30-40 मिनट में 70 किलो वजन वाले व्यक्ति की भी जान ले सकता है। कॉमन करैत जो काले रंग का होता है, अपने सूई जैसे दांतों से दंश करता है, जिसका दर्द महसूस नहीं होता, लेकिन यह भी उतना ही घातक है।


रसल वाइपर, जिसे स्थानीय स्तर पर सुस्कार भी कहते हैं, भारत के चार सबसे खतरनाक सांपों में शामिल है। इसका हीमोटॉक्सिन जहर खून के थक्के बनाता है, जिससे शरीर फटने लगता है और असहनीय दर्द होता है। VTR के जंगलों में इसकी मौजूदगी मानव-सांप टकराव को बढ़ाती है खासकर मानसून में। इस मौसम में सांपों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं, जिससे सतर्कता जरूरी है। VTR में सांपों की विविधता इसे जैव-विविधता का खजाना बनाती है, लेकिन इसके साथ ही जागरूकता और सुरक्षा के उपाय भी काफी जरूरी हैं।