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नियोजित शिक्षकों की सेवा शर्त तय करने के लिए पहली बैठक शुरू, आमिर सुबहानी कर रहे अध्यक्षता

06-Jul-2020 12:12 PM

PATNA : बिहार में नियोजित शिक्षकों के सेवा शर्तों का निर्धारण करने के लिए गठित कमेटी की पहली बैठक शुरू हो गई है। राज्य के पंचायती राज्य संस्थानों नगर निकाय संस्थानों के अंतर्गत नियुक्त शिक्षकों के साथ-साथ पुस्तकालयाध्यक्षों के सेवा शर्तों में सुधार के लिए राज्य सरकार ने एक कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी के अध्यक्ष सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी हैं। उनकी अध्यक्षता में इस वक्त अहम बैठक जारी है।


बैठक में पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव, वित्त विभाग के प्रधान सचिव, नगर विकास विभाग के सचिव के अलावे शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव आरके महाजन भी शामिल हैं। नियोजित शिक्षकों की सेवाशर्त नियमावली के मद्देनजर ये बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


बता दें कि बिहार कैबिनेट की बैठक में गुरुवार को राज्य के नियोजित शिक्षकों व पुस्तकालयाध्यक्षों की सेवाशर्त में सुधार के लिए कमेटी को पुनर्गठित करने पर अपनी मुहर लगायी थी। इसके तत्काल बाद कमिटी का भी गठन कर दिया गया।शिक्षा विभाग ने इस संबंध में एक संकल्प जारी किया है। समिति के सदस्यों मसलन प्रधान सचिव, सचिव के पदनाम के साथ अपर मुख्य सचिव के पद नाम जोड़ने और प्रधान अपर महाधिवक्ता के स्थान पर महाधिवक्ता की तरफ से नामित अपर महाधिवक्ता को शामिल किया गया है।अब बैठक कर जल्द ड्राफ्ट तैयार कर सरकार सेवा शर्त पर मुहर लगाने को तैयार है। माना जा रहा है कि चुनाव में जाने के पहले सरकार नियोजित शिक्षकों के लिए सेवाशर्त लागू कर देगी।


गौरतलब है कि नियोजित शिक्षकों को पहली जुलाई 2015 से नया वेतनमान का लाभ मिला। लेकिन सेवाशर्त तैयार करने के लिए मुख्य सचिव के स्तर पर एक कमेटी बनायी गयी, वित्त और शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव भी कमेटी में शामिल थे।  कमेटी की कई बैठकें हुईं। इस कमेटी के सहयोग के लिए शिक्षा विभाग की भी एक उप समिति बनी। इस उप समिति ने कई दूसरे राज्यों के नियोजित शिक्षकों की सेवाशर्त का भी अध्ययन किया था। 


मुख्य सचिव की कमेटी के समक्ष सभी नियोजित शिक्षक संघों के प्रतिनिधियों का भी पक्ष लिया गया। सेवाशर्त का एक ड्राफ्ट भी बना लेकिन वर्ष 2017 में नियोजित शिक्षकों को स्थायी शिक्षकों के समान वेतन देने से संबंधित एक वाद पर सुनवाई में पटना उच्च न्यायालय के आदेश के प्रभाव से नियोजित शिक्षकों की नियमावली ही कायम नहीं रह सकी। फिर सरकार हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गयी। करीब दो साल यहां मामला चला और 2019 बीतने के महज कुछ माह पूर्व फैसला आने पर फिर से नियोजित शिक्षकों की सेवाशर्त की मांग तेज होने लगी।


बता दें कि बिहार के प्रारंभिक से लेकर माध्यमिक-उच्च माध्यमिक सरकारी विद्यालयों में कार्यरत करीब चार लाख नियोजित शिक्षकों की चिर प्रतीक्षित सेवाशर्त की मांग लंबे समय से चली आ रही है। सेवाशर्त की सुविधा मिलते ही नियोजित शिक्षकों की प्रोन्नति का लाभ मिलेगा और हेडमास्टर तक बन पायेंगे। दूसरा बड़ा लाभ नियोजन क्षेत्र से बाहर तबादले का मिल सकता है।