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मुंगेर में स्वास्थ्य विभाग की खुली पोल : सवारी ढोने वाले मैजिक वैन को एम्बुलेंस बनाकर मरीज को किया गया रेफर

28-May-2024 04:52 PM

By First Bihar

MUNGER : बिहार के सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था का दावा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आए दिन करते रहते हैं। लेकिन इन दावों की पोल मुंगेर में खुल गयी। जहां मरीज भगवान भरोसे अपना इलाज कराने अस्पताल आते हैं। हालत यह है कि एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं रहने के कारण प्राइवेट मैजिक गाड़ी को एम्बुलेंस बनाकर मरीज को रेफर कर दिया जाता है। ऑटो में अस्पताल के कर्मचारियों ने ऑक्सीजन सिलेंडर और पानी का बोतल लगा दिया है। जब मरीज को धरहरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से मुंगेर सदर अस्पताल लाया गया, तब इसे देखकर लोग हैरान रह गये। मरीज के परिजन से मैजिक गाड़ी वाले ने 1500 रुपये भी ले लिये। 


मुंगेर जिला के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धरहरा का यह मामला है। जहां बिना स्वास्थ्यकर्मी के ही मरीज को प्राइवेट सवारी गाड़ी में लिटाकर सरकारी ऑक्सीजन सिलेंडर और पानी चढ़ाकर मुंगेर सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ न तो कोई कंपाउंडर था और न ही कोई सहायक। राम भरोसे परिजन मरीज को लेकर मुंगेर सदर अस्पताल पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया। सरकार भले ही स्वास्थ विभाग में सुधार के लाख दावे कर लें पर इस वीडियो को देखने के बाद उन दावों की जमीनी हकीकत की पोल खुलती नजर आती है।


दरअसल, जब एक प्राइवेट मैजिक वाहन एक महिला मरीज को लेकर सदर अस्पताल परिसर जैसे ही पहुंचा, अस्पताल परिसर में उपस्थित लोग उस मैजिक सवारी गाड़ी को देखने लगे। फिर चर्चा होने लगी कि एक एम्बुेंस तक सरकार के पास नहीं है कि मैजिक सवारी वाहन में ऑक्सीजन सिलेंडर और पानी लगाकर मैजिक सवारी गाड़ी से अस्पताल लाया जा रहा है। इस संबंध में जब मरीज के परिजन से जब बात की गयी तब जो कुछ उन्होंने बताया, उसे सुनकर स्वास्थ्य विभाग की पोल खुल गई। 


परिजनो ने बताया की मरीज निशा गुप्ता को सांस लेने में दिक्कत के कारण धरहरा पीएचसी में भर्ती कराया गया था। जहां के डॉक्टरों ने उसे मुंगेर सदर अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन अस्पताल में उस समय एंबुलेंस नहीं था। जिसके कारण मजबूरन मरीज के परिजनो ने एक प्राइवेट मैजिक सवारी वाहन पर मरीज को लिटाया गया और उस मैजिक में पीएचसी के कर्मियों ने ऑक्सीजन सिलेंडर और पानी की बोतल मरीज को लगाकर मुंगेर सदर अस्पताल के लिए रवाना किया। 


इस दौरान अस्पताल प्रबंधन द्वारा घोर लापरवाही बरती गयी। ऑक्सीजन लगे मरीज के साथ न तो कोई कंपाउंडर भेजा गया और न ही किसी टेक्नीशियन को। परेशान परिजनों ने सवारी ढोने वाले मैजिक वैन को बुलाया। जिसके बाद 1500 रुपये में भाड़ा तय हुआ। जिसके बाद मरीज को सदर अस्पताल लाया गया। इतना ही नहीं, मुंगेर सदर अस्पताल मे मरीजों को जब प्राइवेट वाहन से उतार कर इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराने ले जा रहा थे तब मरीज को उतारने के समय भी कोई महिला स्वास्थकर्मी वहां मौजूद नहीं थी। 


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