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18-Mar-2026 02:35 PM
By First Bihar
Bihar school : बिहार के मुंगेर जिले के असरगंज प्रखंड से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मध्य विद्यालय सजुआ में छात्रों और शिक्षकों के बीच कथित “चिकन पार्टी” को लेकर हंगामा मच गया। स्कूल के प्रधानाध्यापक पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने स्कूल के किचन में चिकन बनाकर पार्टी का आयोजन किया, जबकि बच्चों की परीक्षा चल रही थी। इस घटना ने स्थानीय शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना की जानकारी मिलने पर जब पत्रकार स्कूल पहुंचे, तो स्कूल का मुख्य गेट बंद पाया गया। बाहर कई छात्र किताब-कॉपी लेकर खड़े थे और यह साफ था कि कुछ असंतोष छात्रों में बढ़ गया था। बच्चों से पूछताछ करने पर आयुष कुमार नामक छात्र ने बताया कि परीक्षा चल रही थी, लेकिन कुछ बच्चों ने स्कूल में चिकन पार्टी का इंतजाम होते देखा।
छात्रों के अनुसार, शिक्षकों ने बच्चों को परीक्षा के बीच ही बाहर निकाल दिया और मुख्य गेट पर ताला लगा दिया। बच्चों का कहना है कि अंदर शिक्षक चिकन बना रहे थे और इसका आनंद ले रहे थे। गेट पर बाहर खड़े छात्रों ने नाराजगी जताई और कुछ समय बाद गेट पर लात मारकर विरोध प्रदर्शन किया, जिससे शिक्षकों को मजबूरन गेट खोलना पड़ा।
मामले में जब प्रधानाध्यापक प्रदीप कुमार सिंह से संपर्क किया गया, तो उन्होंने आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि स्कूल में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है और बच्चों द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं। प्रधानाध्यापक ने पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि स्कूल की प्रतिष्ठा को धक्का पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं और वास्तविकता से इसका कोई लेना-देना नहीं है।
वहीं, इस मामले में प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अमित कुमार ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि उन्हें इस संबंध में सूचना मिली है और यह मामला गंभीर है। उन्होंने कहा कि स्कूल के खिलाफ पहले भी कुछ शिकायतें मिल चुकी हैं और अब मामले की पूरी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों और छात्रों के बीच इस घटना ने भारी चर्चा पैदा कर दी है। कई लोगों का मानना है कि बच्चों को परीक्षा के दौरान इस तरह बाहर निकालना और शिक्षकों द्वारा कथित पार्टी आयोजित करना शिक्षा व्यवस्था की गंभीर अनदेखी को दर्शाता है। वहीं कुछ लोग प्रधानाध्यापक के पक्ष में हैं और उनका कहना है कि यह केवल अफवाह हो सकती है और बच्चों की प्रतिक्रिया अतिशयोक्ति है।
विद्यालय की इस घटना ने शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल प्रशासन को हमेशा पारदर्शी रहना चाहिए और बच्चों के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए। परीक्षा के समय किसी तरह का आयोजन या व्यक्तिगत कार्यक्रम छात्रों की पढ़ाई में बाधा डाल सकता है।
इस घटना के बाद असरगंज प्रखंड के शिक्षा अधिकारियों ने स्थिति पर कड़ी नजर रखने का फैसला किया है। जांच पूरी होने तक स्कूल प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे पारदर्शिता बनाए रखें और छात्रों की पढ़ाई में किसी प्रकार की बाधा न आए।
हालांकि प्रधानाध्यापक ने आरोपों को खारिज किया है, लेकिन स्थानीय समुदाय और अभिभावक इस मामले में गंभीरता बनाए हुए हैं। उन्हें यह चिंता है कि अगर स्कूल प्रशासन की गतिविधियों पर निगरानी नहीं रखी गई, तो इससे बच्चों की शिक्षा और अनुशासन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
अभी तक मामले की जांच जारी है और शिक्षा विभाग जल्द ही रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। स्थानीय लोगों की उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। इस तरह, मुंगेर के मध्य विद्यालय सजुआ की यह घटना शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जिम्मेदारी की आवश्यकता को उजागर करती है। बच्चों और अभिभावकों के सवालों का समाधान तभी संभव है जब स्कूल प्रशासन और शिक्षा अधिकारी मिलकर स्थिति को गंभीरता से संभालें।