ब्रेकिंग न्यूज़

BIHAR NEWS : पटना से बड़ा ऐलान! अब देश के किसी भी कोने से मदद मांग सकेंगे बिहार के प्रवासी मजदूर LPG supply rule : यदि आपके भी घर के पास पहुंच गई है PNG तो अब हर हाल में लेना होगा कनेक्शन, सरकार का सख्त आदेश, कहा —सिलेंडर होगा बंद PNG online apply : बिहार में PNG कनेक्शन लेना हुआ आसान, इस तरह ऑनलाइन करें अप्लाई; LPG पर नए नियम से उपभोक्ताओं में हलचल IRCTC fine : पटना- टाटा वंदे भारत में यात्रियों को परोसा गया खराब खाना, अब रेलवे ने लिया एक्शन; IRCTC और वेंडर पर लगाया लाखों का जुर्माना Bihar school : बिहार के स्कूलों में अब हर सुबह राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ से होगी शुरुआत – जानें नए निर्देश और नियम बाढ़ में ‘एक शाम शहीदों के नाम’ कार्यक्रम में खाली रह गई कुर्सियां, प्रचार-प्रसार को लेकर प्रशासन पर उठ रहे सवाल UCC पर डॉ प्रेम कुमार का बड़ा बयान, बोले- ‘एक देश, एक कानून’ पूरे भारत में लागू हो मंत्री अशोक चौधरी बने असिस्टेंट प्रोफेसर, पटना के एएन कॉलेज में ली पहली क्लास मुंगेर के स्कूल में बड़ी चोरी: ताले तोड़कर लाखों की संपत्ति को पहुंचाया नुकसान, निर्माण सामग्री भी किया गायब मुजफ्फरपुर में रामनवमी को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम: चप्पे-चप्पे पर रहेगी पुलिस की नजर, ड्रोन और CCTV से होगी निगरानी

Home / bihar / देशभर के मेडिकल कॉलेजों में डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड अनिवार्य, अब हर मरीज के...

देशभर के मेडिकल कॉलेजों में डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड अनिवार्य, अब हर मरीज के लिए आभा नंबर जरूरी; बिहार में भी जल्द लागू होगी नई व्यवस्था

Digital Health Record: मेडिकल कॉलेजों में अब हर मरीज के लिए डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और आभा नंबर अनिवार्य कर दिया गया है. बिहार में भी इसे लागू करने की प्रक्रिया तेज हो गई है.

22-Mar-2026 01:05 PM

By FIRST BIHAR

Digital Health Record: राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के नए निर्देशों के बाद देशभर के मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में मरीजों का डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड रखना अनिवार्य कर दिया गया है। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सभी डीन, अधीक्षक और प्राचार्यों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। बिहार सरकार ने भी इसे तेजी से लागू करने की पहल शुरू कर दी है।


नए नियम के तहत बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी), आंतरिक रोगी विभाग (आईपीडी) और आपातकालीन सेवाओं में आने वाले हर मरीज के लिए आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) नंबर बनाना जरूरी होगा। यही आभा नंबर मरीज के इलाज, जांच और दवाओं से जुड़ा रहेगा, जिससे उसका पूरा मेडिकल इतिहास एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा।


इस व्यवस्था से मरीजों को बार-बार पुराने कागजात साथ लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। किसी भी अस्पताल में इलाज के दौरान मरीज का पूरा रिकॉर्ड तुरंत उपलब्ध हो सकेगा, जिससे इलाज में देरी कम होगी और सटीक उपचार संभव हो पाएगा। खासकर आपातकालीन स्थितियों में डॉक्टरों को जरूरी जानकारी तुरंत मिल सकेगी।


एमसीआई ने आभा नंबर बनाने की प्रक्रिया को भी सरल कर दिया है। अब मोबाइल नंबर या आधार के जरिए कुछ ही मिनटों में रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है, जिससे लंबी कतारों और कागजी प्रक्रिया से राहत मिलेगी।


डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली से मेडिकल कॉलेजों के मूल्यांकन और मान्यता (रिन्यूअल) की प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष होगी। हर मरीज और उसके इलाज का डेटा दर्ज होने से संस्थानों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।


इस पहल को स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इससे सरकारी अस्पतालों पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा, मरीजों को तेज और बेहतर इलाज मिलेगा, और पूरे देश में एकीकृत हेल्थ डेटा सिस्टम विकसित हो सकेगा।