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Bihar Vidhan Sabha : बिहार विधानसभा में शून्यकाल की सूचना अब ऑनलाइन माध्यम से होगी स्वीकार, पढ़िए विधायकों को क्या -क्या करना होगा

बिहार विधानसभा सचिवालय ने शून्यकाल की सूचना प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। 23 फरवरी 2026 से सभी सदस्य नेवा पोर्टल के माध्यम से सुबह 9 से 10 बजे के बीच ऑनलाइन सूचना देंगे। ऑफलाइन या हस्तलिखित नोटिस स्वीकार नहीं होंगे।

20-Feb-2026 01:03 PM

By First Bihar

Bihar Vidhan Sabha : बिहार विधान सभा ने सदन की कार्यवाही को अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब शून्यकाल की सूचनाएँ ऑफलाइन के बजाय पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार की जाएंगी। इस संबंध में विधानसभा सचिवालय की ओर से आधिकारिक सूचना जारी कर दी गई है। नई व्यवस्था सोमवार, 23 फरवरी 2026 से प्रभावी होगी। उक्त तिथि के बाद सभी माननीय सदस्यों को शून्यकाल की सूचना केवल विधान सभा के अधिकृत ऑनलाइन पोर्टल ‘नेवा’ के माध्यम से ही भेजनी होगी।


सचिवालय द्वारा जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि इस परिवर्तन के तहत नियमों में कोई संशोधन नहीं किया जा रहा है। शून्यकाल से संबंधित नियमावली पूर्ववत ही लागू रहेगी। केवल सूचना देने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। इसका उद्देश्य कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाना और अनावश्यक भीड़ तथा कागजी प्रक्रिया को समाप्त करना है। अब ऑफलाइन, हस्तलिखित अथवा भौतिक रूप में दी गई सूचनाएं स्वीकार नहीं की जाएंगी। सभी सूचनाएं ऑनलाइन माध्यम से ही दर्ज की जाएंगी।


नई व्यवस्था के तहत यह भी स्पष्ट किया गया है कि शून्यकाल की सूचना उसी दिन ली जाएगी जिस दिन सदन की बैठक निर्धारित होगी। नेवा पोर्टल सुबह ठीक 9 बजे खुलेगा और 10 बजे तक सक्रिय रहेगा। इस एक घंटे की अवधि में माननीय सदस्य अपनी सूचना दर्ज कर सकेंगे। पोर्टल पर सूचनाओं का क्रम स्वतः निर्धारित होता जाएगा, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहेगी। यह प्रणाली पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर क्रम तय करेगी।


सूचनाएं यूनिकोड फॉन्ट में टंकित होना अनिवार्य किया गया है और शब्द सीमा अधिकतम पचास शब्द निर्धारित की गई है। इसका उद्देश्य संक्षिप्त, स्पष्ट और तात्कालिक मुद्दों को ही शून्यकाल में उठाने की परंपरा को बनाए रखना है। सदस्यों को यह भी ध्यान रखना होगा कि जिन विषयों को प्रश्न, ध्यानाकर्षण, निवेदन या याचिका के माध्यम से पहले ही सूचीबद्ध किया जा चुका है, उन्हें शून्यकाल में नहीं उठाया जाएगा।


बिहार विधान सभा की संसदीय व्यवस्था में शून्यकाल एक महत्वपूर्ण अवधि मानी जाती है। यह प्रश्नकाल के तुरंत बाद और सूचीबद्ध कार्य शुरू होने से पहले होती है। दोपहर 12 बजे प्रारंभ होने के कारण इसे ‘शून्यकाल’ कहा जाता है। इस दौरान सदस्य जनहित से जुड़े तात्कालिक और अति लोकमहत्व के मुद्दे उठाते हैं, जिन पर सरकार का तत्काल ध्यान आकृष्ट करना आवश्यक होता है। इसलिए इसकी प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना आवश्यक समझा गया।


सचिवालय ने यह भी बताया है कि नई डिजिटल प्रणाली लागू होने के बाद सदस्यों को सुबह-सुबह सचिवालय पहुंचने की आवश्यकता नहीं होगी। अब वे अपने कार्यालय या निवास से ही निर्धारित समय के भीतर सूचना भेज सकेंगे। इससे समय की बचत होगी और प्रशासनिक दबाव भी कम होगा। आवश्यक तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन के लिए विधानसभा सचिवालय के नेवा सेवा केंद्र की सुविधा उपलब्ध रहेगी, ताकि किसी भी सदस्य को तकनीकी दिक्कत का सामना न करना पड़े।


यह पहल विधानसभा की कार्यप्रणाली को डिजिटल और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार मानी जा रही है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, प्रक्रिया में समान अवसर सुनिश्चित होगा और सदन की कार्यकुशलता में वृद्धि होगी। सचिवालय को विश्वास है कि सभी माननीय सदस्य इस नई प्रणाली को सकारात्मक रूप से अपनाएंगे और संसदीय कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने में सहयोग देंगे।