1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 02, 2026, 6:45:32 PM
पटना में हेल्थ कैंप - फ़ोटो सोशल मीडिया
PATNA: हकलाना, तुतलाना, स्वर का स्पष्ट नहीं निकलना जैसी समस्याएँ ऐसी हैं, जो व्यक्ति के आत्म-विश्वास को कमजोर करती हैं। ऐसे व्यक्ति जीवन में सफलता के लिए सदैव सशंकित रहते हैं। ये ऐसी समस्याएँ भी नहीं हैं कि जिनका उपचार नहीं हो सकता। वाक् एवं श्रवण विज्ञान के क्षेत्र में इतना तकनीकी विकास हो चुका है कि ऐसे मरीज़ पूरी तरह से रोग-मुक्त हो सकते हैं।
एक दिन के बच्चे की भी जाँच कर बताया जा सकता है कि वह बहरा तो नहीं है। उसे श्रवण-यंत्र देकर, आवश्यकतानुसार कृत्रिम-कान का प्रत्यारोपण कर सुनने योग्य बनाया जा सकता है और स्पीच-थेरापी से बोलने योग्य बनाया जा सकता है।यह बातें शुक्रवार को बेऊर स्थित इंडियन इंस्टिच्युट ऑफ हेल्थ एडुकेशन ऐंड रिसर्च में आज से आरम्भ हुए 'निःशुल्क श्रवण-जाँच एवं वाक्-चिकित्सा शिविर' के उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के निदेशक-प्रमुख और सुप्रसिद्ध साहित्यकार डा अनिल सुलभ ने कही।
डॉ. सुलभ ने कहा कि इस संस्थान में पूरे अप्रैल भर सुनने और बोलने से संबंधित सभी समस्याओं की निःशुल्क जाँच के साथ स्पीच-थेरापी की सुविधा भी निःशुल्क उपलब्ध करायी जाएगी। समारोह के मुख्य-अतिथि और बिहार के पूर्व पुलिस महानिरीक्षक उमेश कुमार सिंह ने कहा कि समाज में अब भी जागरूकता की कमी है। बहुत थोड़े से लोग जानते हैं कि हकलाने-तुतलाने जैसी बीमारियों का उपचार हो सकता है। ऐसे शिविरों के माध्यम से सामाजिक जागरूकता भी आती है।
विशिष्ट अतिथि और पूर्व पुलिस उपाधीक्षक रामचंद्र राम ने अपनी पत्नी का उदाहरण देकर बताया कि किस प्रकार इस संस्थान के एक फीजियोथेरापी के छात्र ने, उनकी पत्नी जो चलने से लाचार हो गयीं थीं, उन्हें चलने-फिरने योग्य बना दिया। अब वो अपने सारे कार्य स्वयं करती हैं।
इस अवसर पर सुप्रसिद्ध चिकित्सक डा रामानुज शर्मा, डा ललन कुमार, डा संजीत कुमार, ईं बी पी सिंह, प्रो कपिल मुनि दूबे ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अतिथियों का स्वागत संस्थान के ऑडियोलौजी ऐंड स्पीच पैथोलौजी विभाग की प्रभारी अध्यक्ष डा नेहा कुमारी ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन संस्थान के छात्र-कल्याण संकायाध्यक्ष अधिवक्ता अहसास मणिकान्त ने किया। मंच का संचालन डा संतोष कुमार सिंह ने किया।
इस अवसर पर संस्थान के प्रशासी पदाधिकारी सूबेदार संजय कुमार, प्रो चंद्रा आभा, डा आदित्य कमार ओझा, प्रो नीतीश कुमार भार्गव समेत बड़ी संख्या में उपचार के लिए आए मरीज़ और संस्थान के छात्रगण उपस्थित थे। शिविर के पहले दिन कुल २५२ व्यक्तियों की जाँच की गयी, जिनमे से ६५ को स्पीचथेरापी के लिए चिन्हित किया गया है। कम सुनने वाले व्यक्तियों को श्रवण-यंत्र दिए जाएंगे। शेष व्यक्तियों को उचित परामर्श देकर विदा किया गया। शिविर में डा नेहा कुमारी, डा आकाश कुमार, डा धनंजय कुमार, कनीय स्पीचथेरापिस्ट अनन्या कुमारी,कुणाल प्रकाश, शिवानी कुमारी तथा हिमांशु कुमार सिंह ने भी अपनी सेवाएँ दीं।





