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20-Feb-2026 11:31 AM
By First Bihar
Bihar Politics : बिहार विधानसभा के बजट सत्र के प्रश्नकाल के दौरान आज सदन में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर दिलचस्प लेकिन गंभीर चर्चा देखने को मिली। सत्तापक्ष के एक विधायक ने अपने ही कोटे के मंत्री के जवाब पर असंतोष जताते हुए उप स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल स्थिति का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र में स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र की हालत इतनी जर्जर है कि वहां काम करना मुश्किल हो गया है।
विधायक ने सदन में कहा कि “निधि की उपलब्धता होने पर भवन बनाया जाएगा” जैसे जवाब से वह संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्तमान में उप स्वास्थ्य केंद्र जैसे-तैसे चल रहा है। बिना समुचित भवन के स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं और मरीजों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि संबंधित भवन लगभग 30 साल पहले बनाया गया था। छत ढली हुई है, लेकिन खिड़की-दरवाजे नहीं हैं। बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब आधा भवन पानी में डूब जाता है। ऐसी स्थिति में न तो दवाओं को सुरक्षित रखा जा सकता है और न ही मरीजों का समुचित इलाज हो पाता है। स्वास्थ्यकर्मियों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
विधायक ने राजनीतिक पहलू का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्षी दल के नेता अक्सर वहां जाकर जर्जर भवन की तस्वीरें खींचते हैं और सोशल मीडिया पर यह कहते हुए प्रचार करते हैं कि “देखिए, यही है सुशासन का अस्पताल।” उन्होंने कहा कि चुनाव के समय भी इस मुद्दे को लेकर विरोधियों ने दुष्प्रचार किया था, जिससे क्षेत्र में सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा।
उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे से आग्रह करते हुए कहा कि नए भवन का निर्माण अविलंब कराया जाए ताकि क्षेत्र की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके और सरकार की छवि भी मजबूत हो।
इस पर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि वह विधायक की बात को नजरअंदाज नहीं कर सकते। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उप स्वास्थ्य केंद्र के भवन का निर्माण अगले वित्तीय वर्ष में करा लिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि सरकार चरणबद्ध तरीके से स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और जहां भी आवश्यकता है, वहां नए भवनों का निर्माण कराया जाएगा।
मंत्री के आश्वासन के बाद विधायक ने एक और सुझाव देते हुए कहा कि जो पुराना जर्जर भवन है, उसे ध्वस्त कर दिया जाए। उनका तर्क था कि जब तक वह ढांचा खड़ा रहेगा, तब तक विरोधी दल के लोग वहां जाकर तस्वीरें खींचकर राजनीतिक मुद्दा बनाते रहेंगे।
इस पूरी चर्चा के दौरान सदन में हल्की-फुल्की नोकझोंक भी देखने को मिली, लेकिन अंततः मंत्री के आश्वासन से मामला शांत हो गया। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अगले वित्तीय वर्ष में वाकई नए भवन का निर्माण कार्य शुरू होता है या नहीं।