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पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मस्जिद-कब्रिस्तान विवाद सुलझा, आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे का रास्ता हुआ साफ

Bihar News: बिहार के समस्तीपुर जिले में मस्जिद और कब्रिस्तान की जमीन पर हाईवे निर्माण को लेकर चल रहे विवाद में बड़ा फैसला आया है। पटना हाईकोर्ट ने बिहार राज्य वक्फ ट्रिब्यूनल के आदेश को रद्द कर दिया है, जिससे आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए रा

18-Mar-2026 05:26 PM

By First Bihar

Bihar News: बिहार के समस्तीपुर जिले से जुड़ा एक अहम मामला सामने आया है, जहां मस्जिद और कब्रिस्तान की जमीन पर हाईवे निर्माण को लेकर चल रहा विवाद अब काफी हद तक सुलझ गया है। पटना हाईकोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए बिहार राज्य वक्फ ट्रिब्यूनल के आदेश को रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद हाईवे निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।


दरअसल, पहले बिहार राज्य वक्फ ट्रिब्यूनल ने इन जमीनों पर निर्माण कार्य और अधिग्रहण पर रोक लगा दी थी। ट्रिब्यूनल का कहना था कि जिन जमीनों पर मस्जिद और कब्रिस्तान दर्ज हैं, उनका अधिग्रहण वक्फ अधिनियम 1995 के नियमों के अनुसार नहीं किया गया है। इस आदेश के चलते हाईवे प्रोजेक्ट का काम रुक गया था और आगे की प्रक्रिया बाधित हो गई थी।


इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। NHAI का कहना था कि राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया नेशनल हाईवे अधिनियम 1956 के तहत होती है, जो अपने आप में पूरी तरह सक्षम और स्वतंत्र कानून है। ऐसे में वक्फ ट्रिब्यूनल को इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने या रोक लगाने का अधिकार नहीं है।


मामले की सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक चौधरी ने स्पष्ट कहा कि वक्फ ट्रिब्यूनल ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल को जमीन अधिग्रहण या निर्माण कार्य पर रोक लगाने का अधिकार नहीं है। इसलिए उसका आदेश कानून के अनुरूप नहीं माना जा सकता।


हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नेशनल हाईवे अधिनियम 1956 के तहत सार्वजनिक हित में जमीन का अधिग्रहण किया जा सकता है। इसमें वक्फ अधिनियम 1995 की धारा 91 बाधा नहीं बन सकती। हालांकि, अदालत ने यह जरूर कहा कि वक्फ बोर्ड को इस प्रक्रिया में शामिल करना जरूरी है, ताकि उसे मुआवजे से संबंधित जानकारी दी जा सके और वह अपनी बात रख सके।


इस फैसले के बाद लंबे समय से अटका हुआ आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे परियोजना का रास्ता साफ हो गया है। यह एक्सप्रेसवे बिहार के लिए एक महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट माना जा रहा है।


जानकारी के अनुसार, इस एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए NHAI ने समस्तीपुर जिले के शाहपुर और मोहिउद्दीनपुर इलाके में कुछ जमीनों का अधिग्रहण किया था, जिनमें मस्जिद और कब्रिस्तान की जमीन भी शामिल थी। इसी को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ और मामला वक्फ ट्रिब्यूनल तक पहुंचा था।


अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद इस प्रोजेक्ट में आ रही बाधाएं दूर हो गई हैं और निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल गया है।


आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे बिहार का पहला एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे होगा। यह लगभग 189 किलोमीटर लंबा होगा और आमस से शुरू होकर दरभंगा जिले में एनएच-27 तक जाएगा। यह एक्सप्रेसवे कई महत्वपूर्ण जिलों जैसे गया, औरंगाबाद, जहानाबाद, पटना, वैशाली, समस्तीपुर और दरभंगा से होकर गुजरेगा।


इस हाईवे के बनने से उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच यात्रा काफी आसान और तेज हो जाएगी। साथ ही व्यापार, परिवहन और क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।