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23-Aug-2025 08:47 AM
By First Bihar
Bihar News: बिहार के सुपौल जिले के सरायगढ़ भपटियाही प्रखंड में गिरधारी मौजा की करीब 2000 एकड़ जमीन का ऑनलाइन रिकॉर्ड गायब होने से हजारों किसान गंभीर संकट में हैं। तकनीकी गड़बड़ी के कारण पिछले डेढ़ साल से इस गांव की जमीन का विवरण बिहार सरकार के भूलेख पोर्टल से हट गया है, जिससे किसान न तो जमीन की खरीद-बिक्री कर पा रहे हैं और न ही कागजात में सुधार करा पा रहे हैं। शुक्रवार को कई प्रभावित किसानों ने जिलाधिकारी सावन कुमार के जनता दरबार में पहुंचकर इस मसले को उठाया और तत्काल समाधान की मांग की। इस स्थिति ने किसानों के बीच भविष्य में जमीन के स्वामित्व को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
गिरधारी मौजा के किसानों, जैसे मु. याहिया, राज नारायण ठाकुर, मु. अलाउद्दीन, जनक यादव और ललित रजक ने बताया कि वे महीनों से अंचल कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। कई किसान जमीन बेचकर बच्चों की पढ़ाई या बेटियों की शादी करना चाहते थे, लेकिन ऑनलाइन रिकॉर्ड न होने से यह संभव नहीं हो रहा। कुछ ने अग्रिम राशि देकर जमीन खरीदने की कोशिश की, लेकिन कागजात की कमी से उनका पैसा फंस गया है। राज्य सरकार के राजस्व महाअभियान के तहत अन्य गांवों में जमीन विवाद सुलझाए जा रहे हैं, लेकिन गिरधारी मौजा के किसान इस अभियान से भी वंचित हैं क्योंकि विभागीय कर्मचारी यहां आने से कतरा रहे हैं।
किसानों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर जमीन का रिकॉर्ड गायब होना न केवल तकनीकी लापरवाही है बल्कि उनके पुश्तैनी स्वामित्व पर भी खतरा पैदा कर रहा है। अगर यह समस्या स्थायी हो गई तो भविष्य में जमीन का मालिकाना हक साबित करना मुश्किल हो सकता है। अंचलाधिकारी धीरज कुमार ने स्वीकार किया कि यह जटिल तकनीकी गड़बड़ी है, जिसका समाधान पटना से होना है। उन्होंने बताया कि इस बारे में बार-बार लिखित जानकारी भेजी गई लेकिन अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करेंगे।
यह मामला बिहार सरकार के भूलेख डिजिटलीकरण और पारदर्शी भू-अभिलेख प्रणाली के दावों पर सवाल उठाता है। बिहार में चल रहे डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम के तहत भूलेख पोर्टल पर जमीन के रिकॉर्ड उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन गिरधारी मौजा जैसे मामले इसकी खामियों को उजागर करते हैं। कोशी प्रमंडल में भूदान की 38,900 एकड़ जमीन के अवैध अतिक्रमण और दस्तावेजों की समस्याएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। किसानों की नजर अब जिला प्रशासन पर टिकी है जो इस गड़बड़ी को ठीक करने के लिए ठोस कदम उठाए ताकि उनकी जमीन और आजीविका सुरक्षित रहे।