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डबल इंजन की सरकार में डिजिटल प्लेटफॉर्म से बदलेगा नर्सिंग शिक्षा का चेहरा: मंगल पांडेय

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने नर्सिंग संस्थानों की मान्यता प्रक्रिया के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया। अब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी होगी, जिससे गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी।

बिहार न्यूज
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

PATNA:  बिहार में नर्सिंग शिक्षा के क्षेत्र में एक नई क्रांति का आगाज हुआ है। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने नर्सिंग संस्थानों को मान्यता देने की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने वाला प्लेटफॉर्म शास्त्री नगर, पटना में शुभारंभ किया। इस नई व्यवस्था से नर्सिंग कॉलेजों की एनओसी प्रक्रिया अब पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी हो जाएगी।


इस पहल का उद्देश्य न केवल प्रक्रियाओं को सरल बनाना है, बल्कि नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता और निगरानी को भी मजबूत करना है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बिहार के नर्सिंग संस्थानों के योग्य डिग्रीधारक अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सेवाएं प्रदान कर सकेंगे।


स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय के द्वारा नर्सिंग संस्थानों को मान्यता प्रदान करने हेतु एक डिजिटल प्लेटफॉर्म का ऊर्जा ऑडिटोरियम (शास्त्री नगर) में शुभारंभ किया गया। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से नर्सिंग संस्थानों की मान्यता (एनओसी) से जुड़ी पूरी प्रक्रिया अब ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से संपन्न होगी। इस अवसर पर पांच संस्थानों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया। श्री पांडेय ने कहा कि आज का दिन बिहार के स्वास्थ्य तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक है। आज हम केवल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म का शुभारंभ नहीं कर रहे हैं, बल्कि हम बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से और अधिक सशक्त, संगठित और प्रभावी बना रहे हैं। यह नई व्यवस्था स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई क्रांति है। आने वाले दिनों मे यह स्वास्थ्य सेवा का एक मजबूत आधार बनेगा। इस नई व्यवस्था के तहत योग्य नर्सिंग स्टाफ राज्य के मरीजों को गुणवत्तापूर्ण सेव दे पाएंगे।


मंगल पांडेय ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में ’’सात निश्चय-2’’ के तहत नर्सिंग संस्थानों के विकास पर विशेष बल दिया गया है। एक दशक पहले बिहार में नर्सिंग शिक्षा के अवसर सीमित थे, जबकि आज राज्य में एएनएम, जीएनएम, बीएससी और एमएससी नर्सिंग के कुल 656 सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थान संचालित हो रहे हैं। जिनमें 41,065 स्वीकृत सीटें उपलब्ध हैं। अब  डिजिटल प्लेटफॉर्म संस्थानों की निगरानी और डेटा प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ करेगा। आने वाले समय में बिहार देश के लिए एक आदर्श मॉडल बनकर उभरेगा। यह नई व्यवस्था स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई क्रांति है। राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है। नर्सिंग शिक्षा इस दिशा में एक सशक्त माध्यम है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद बिहार के नर्सिंग संस्थानों के डिग्रीधारक की योग्यता राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मानक के अनुरुप होगा। 


मंगल पांडेय ने कहा कि इस पोर्टल को दो प्रमुख उद्देश्यों के साथ विकसित किया गया है। पहला, नए नर्सिंग कॉलेजों के लिए आवेदन एवं एनओसी प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से होगी। दूसरा, पहले से मान्यता प्राप्त संस्थान यदि अपनी सीट बढ़ाना चाहते हैं या संस्थान को अपग्रेड करना चाहते हैं। वे भी इसी पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म न केवल प्रक्रियाओं को सरल बनाएगा, बल्कि गुणवत्ता सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। लेकिन गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। 


इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री लोकेश कुमार सिंह ने कहा कि पहले नर्सिंग संस्थानों की मान्यता की प्रक्रिया कागजी कार्यवाही पर आधारित थी, जिसे अब डिजिटल कर दिया गया है। इससे न केवल गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी। कार्यक्रम में श्री लोकेश कुमार सिंह, सचिव, स्वास्थ्य विभाग, श्री अमित कुमार पाण्डेय, कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, श्रीमती अनुपमा सिंह, संयुक्त सचिव, स्वास्थ्य विभाग, श्री अमिताभ सिंह, आप्त सचिव, स्वास्थ्य मंत्री, श्री सुरेंद्र राय, ओएसडी, स्वास्थ्य विभाग, श्रीमती रेखा झा, निदेशक प्रमुख (नर्सिंग), माया वर्मा, रजिस्ट्रार, बीएनआरसी, श्री राजेश कुमार, प्रशासी पदाधिकारी, राज्य स्वास्थ्य समिति, श्री देवेंद्र खंडाइत, गेट्स फाउंडेशन सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।

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