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18-Mar-2026 02:00 PM
By First Bihar
BIHAR NEWS : राज्य में खनिज राजस्व संग्रहण को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। उप मुख्यमंत्री सह खान एवं भूतत्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा के निर्देश पर खान एवं भूतत्व विभाग की एक अहम समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता विभाग के निदेशक मनेश कुमार मीणा ने की, जिसमें राज्य के सभी जिलों के खनिज विकास पदाधिकारी (MDO) एवं अन्य संबंधित अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया।
बैठक के दौरान विभागीय कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। खास तौर पर राजस्व समाहरण की वर्तमान स्थिति, दैनिक लक्ष्य की प्रगति और वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति पर गहन चर्चा हुई। निदेशक ने साफ शब्दों में कहा कि राजस्व संग्रहण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि लक्ष्य से पीछे रहने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी।
समीक्षा के क्रम में पाया गया कि कुछ जिलों में राजस्व समाहरण की गति अपेक्षित स्तर पर नहीं है। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए लखीसराय, गया, मुंगेर और वैशाली जिलों के खनिज विकास पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया। निदेशक ने इन जिलों से शीघ्र स्पष्टीकरण देने और राजस्व वसूली में तेजी लाने को कहा। वहीं, जिन जिलों ने अपने निर्धारित लक्ष्य हासिल कर लिए हैं, उन्हें भी संतोष न करने और निरंतर बेहतर प्रदर्शन बनाए रखने का निर्देश दिया गया।
बैठक में बालू, पत्थर और ईंट से प्राप्त होने वाले राजस्व की स्थिति का विस्तार से विश्लेषण किया गया। इसके साथ ही कार्य विभागों से प्राप्त होने वाले संग्रहण, नीलामी से प्राप्त आय और जुर्माने की राशि पर भी चर्चा की गई। दैनिक राजस्व संग्रहण लक्ष्य की प्राप्ति, विभागीय समन्वय और विभिन्न स्रोतों से आने वाली आय की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की गई।
विशेष रूप से बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया, नीलामित घाटों के सुचारु संचालन और जिन घाटों को वापस लिया गया है उनकी पुनर्नीलामी की स्थिति पर भी फोकस किया गया। ईंट सत्र 2025-26 के अंतर्गत भट्टों से संबंधित भुगतान और उसकी प्रगति की भी विस्तार से समीक्षा की गई। पर्यावरणीय स्वीकृति (EC/CTO/CTE) से जुड़े लंबित मामलों पर निदेशक ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि सभी प्रक्रियाओं को जल्द से जल्द पूरा कर नियमों के अनुरूप घाटों का संचालन सुनिश्चित किया जाए।
इसके अलावा कार्य विभाग से प्राप्त होने वाले राजस्व की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि रॉयल्टी और जुर्माने की राशि की वसूली में तेजी लाई जाए। निदेशक ने कहा कि लंबित निविदा और नीलामी प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करना बेहद जरूरी है, ताकि राजस्व संग्रहण में कोई बाधा न आए।
बड़े जिलों के अधिकारियों को विशेष अभियान चलाकर बकाया राशि की वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने कहा कि जहां भी देय राशि लंबित है, वहां सख्ती से कार्रवाई करते हुए वसूली की जाए।
बैठक के अंत में निदेशक ने पारदर्शिता, जवाबदेही और सतत निगरानी को लक्ष्य प्राप्ति का मूल आधार बताया। उन्होंने सभी अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें, ताकि राज्य के राजस्व में वृद्धि सुनिश्चित हो सके और विकास कार्यों को गति मिल सके।