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21-Mar-2026 08:35 AM
By First Bihar
Bihar news : बिहार की पंचायत व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब ग्रामीण इलाकों में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद उसके परिजनों को मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए लंबे इंतजार से राहत मिलेगी। पंचायती राज विभाग ने ऐसी व्यवस्था तैयार की है, जिसके तहत 24 घंटे के भीतर ही मृतक का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाएगा। इस प्रस्ताव को जल्द ही शीर्ष स्तर पर मंजूरी मिलने की उम्मीद है, जिसके बाद इसे पूरे राज्य में लागू कर दिया जाएगा।
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने इस नई पहल की जानकारी देते हुए बताया कि विभाग डिजिटल माध्यम से इस प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने पर काम कर रहा है। इसके लिए एक विशेष मोबाइल एप विकसित किया जाएगा, जिससे पंचायत स्तर पर ही मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करना संभव हो सकेगा। इस एप के जरिए पंचायत सचिव और अन्य जिम्मेदार कर्मी आसानी से डेटा अपलोड कर सकेंगे और प्रमाणपत्र तुरंत उपलब्ध कराया जा सकेगा।
वर्तमान व्यवस्था में ग्रामीण क्षेत्रों में मृत्यु प्रमाणपत्र जारी होने में लगभग 21 दिन का समय लग जाता है, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी होती है। कई बार उन्हें दलालों और बिचौलियों का सहारा लेना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इस समस्या से पूरी तरह छुटकारा मिलने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य है कि प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए।
इस नई प्रणाली में वार्ड सदस्यों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। विभाग की योजना है कि पंचायतों के निकट स्थित श्मशान घाट या कब्रिस्तान के आसपास के वार्ड सदस्यों को मृतक की पहचान की जिम्मेदारी दी जाए। इसके बदले उन्हें प्रतिमाह 2000 रुपये का मानदेय देने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा प्रत्येक मृत्यु की पुष्टि और संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने के लिए 100 रुपये अतिरिक्त देने की भी योजना है।
अगर किसी कारणवश वार्ड सदस्य उपलब्ध नहीं होते हैं, तो उनकी जगह किसी अन्य कर्मी को यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। मृतक की पहचान के लिए परिवार, पड़ोसी और गांव के अन्य लोगों से जानकारी ली जाएगी, जिससे किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना कम हो सके।
पंचायती राज विभाग केवल मृत्यु प्रमाणपत्र प्रक्रिया को ही नहीं सुधार रहा, बल्कि पंचायतों के बुनियादी ढांचे को भी मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रहा है। इसके तहत राज्य के श्मशान घाटों को “मोक्षधाम” के रूप में विकसित करने की योजना है। प्रत्येक श्मशान घाट पर लगभग 19 लाख रुपये खर्च कर शेड, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
नई व्यवस्था में पंचायत सरकार भवनों को भी तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जाएगा। यहां कंप्यूटरीकृत तरीके से मृत्यु प्रमाणपत्र तैयार कर उसे एप पर अपलोड किया जाएगा। एक बार डेटा अपलोड हो जाने के बाद यह स्थायी रूप से सुरक्षित रहेगा, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की जरूरत पड़ने पर इसे आसानी से प्राप्त किया जा सकेगा।
कुल मिलाकर यह पहल ग्रामीण प्रशासन को डिजिटल और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अगर यह योजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो इससे लाखों लोगों को राहत मिलेगी और सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।