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Bihar Transport Department : बिहार में 27 जिलों में खुलेंगे नए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन, अनफिट गाड़ियों पर कसेगा शिकंजा

बिहार के 27 जिलों में नए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन खुलेंगे। ब्रेक, स्टीयरिंग और धुएं की मशीन जांच से अनफिट गाड़ियों पर लगेगी रोक।

22-Feb-2026 09:10 AM

By First Bihar

Bihar Transport Department : बिहार की सड़कों पर अनफिट वाहनों के परिचालन को रोकने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। परिवहन विभाग ने 27 जिलों में नए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) खोलने का निर्णय लिया है। इसके लिए एजेंसियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं और विभाग की कोशिश है कि इसी वर्ष के भीतर चयन प्रक्रिया पूरी कर संचालन शुरू कर दिया जाए। अधिकारियों का कहना है कि सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से यह पहल की जा रही है।


मशीनों से होगी 30 से अधिक सुरक्षा बिंदुओं की जांच

एटीएस में वाहनों की फिटनेस जांच पूरी तरह मशीन आधारित होती है। इसमें ब्रेक, स्टीयरिंग, सस्पेंशन, हेडलाइट, इंडिकेटर, एक्सल, टायर और अंडरबॉडी समेत 30 से अधिक महत्वपूर्ण सुरक्षा घटकों की जांच की जाती है। इसके अलावा वाहनों से निकलने वाले धुएं की भी कंप्यूटरीकृत जांच होती है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि वाहन पर्यावरण मानकों का पालन कर रहा है या नहीं।


परिवहन विभाग के मुताबिक अनफिट वाहनों को सड़कों से हटाना ही एटीएस का मुख्य उद्देश्य है। विभाग का मानना है कि कई सड़क हादसों के पीछे तकनीकी खराबी, खासकर ब्रेक फेल और स्टीयरिंग सिस्टम की गड़बड़ी, बड़ी वजह बनती है।


आठ एटीएस पहले से संचालित

राज्य में फिलहाल आठ एटीएस संचालित हैं। इनमें पटना में तीन केंद्र जबकि दरभंगा, भागलपुर, हाजीपुर, नालंदा और सासाराम में एक-एक केंद्र कार्यरत हैं। नियमानुसार नई गाड़ियों को दो साल बाद पहली फिटनेस जांच करानी होती है, जबकि आठ साल से अधिक पुरानी व्यावसायिक गाड़ियों को हर वर्ष फिटनेस सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है।अधिकारियों के अनुसार एक वाहन की पूरी जांच में औसतन 15 मिनट का समय लगता है। इस हिसाब से यदि कोई केंद्र चौबीसों घंटे भी संचालित हो तो अधिकतम 100 वाहनों की जांच संभव है।


क्षमता से अधिक जारी हो रहे फिटनेस प्रमाण पत्र

हालांकि, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जानकारी के मुताबिक कई एटीएस केंद्र प्रतिदिन 250 से 300 वाहनों को फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर रहे हैं, जो तकनीकी रूप से संभव नहीं माना जा रहा। इससे केंद्रों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


नियम के अनुसार परिवहन विभाग को हर छह महीने पर इन केंद्रों की जांच करनी है, लेकिन आरोप है कि स्थानीय स्तर पर मिलीभगत के कारण कई केंद्र मनमाने तरीके से संचालित हो रहे हैं। इससे सड़क पर अनफिट गाड़ियों का परिचालन जारी है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है।


27 जिलों में खुलेंगे नए केंद्र

मौजूदा व्यवस्था को सख्त करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए विभाग ने जिन 27 जिलों में नए एटीएस खोलने का निर्णय लिया है, उनमें मुंगेर, जमुई, शेखपुरा, बांका, अररिया, शिवहर, नवादा, सहरसा, किशनगंज, वैशाली, नालंदा, सारण, बेगूसराय, लखीसराय, बेतिया, मधेपुरा, अरवल, खगड़िया, औरंगाबाद, सीतामढ़ी, जहानाबाद, कटिहार, रोहतास, सुपौल, समस्तीपुर, सीवान और दरभंगा शामिल हैं।


विभाग का मानना है कि अधिक जिलों में एटीएस खुलने से वाहनों की जांच प्रक्रिया विकेंद्रीकृत होगी और निगरानी मजबूत होगी। इससे फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने में पारदर्शिता आएगी और अनफिट वाहनों पर प्रभावी रोक लग सकेगी।


सड़क सुरक्षा पर पड़ेगा सकारात्मक असर

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एटीएस की निगरानी सख्ती से की जाए और मशीन आधारित जांच को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू किया जाए तो सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। राज्य में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं के मद्देनजर यह कदम अहम माना जा रहा है।


परिवहन विभाग ने संकेत दिए हैं कि नए केंद्रों के साथ-साथ मौजूदा एटीएस की भी विशेष ऑडिट कराई जाएगी। यदि गड़बड़ी पाई गई तो संबंधित एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार की इस पहल से उम्मीद है कि बिहार की सड़कों पर केवल फिट और सुरक्षित वाहन ही दौड़ेंगे, जिससे आम लोगों की जानमाल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।