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Surya Grahan 2026: साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण आज, जानें समय, प्रभाव और कहां दिखेगा ‘रिंग ऑफ फायर’

Surya Grahan 2026: साल 2026 का पहला वलयाकार सूर्य ग्रहण आज लगेगा, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। यह भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कई देशों में नजर आएगा। ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह ग्रहण विशेष संयोग बना रहा है।

Surya Grahan 2026
प्रतिकात्मक तस्वीर
© Google
Mukesh Srivastava
3 मिनट

Surya Grahan 2026: साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण आज लगने जा रहा है। हिंदू धर्म में सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों को विशेष महत्व दिया जाता है। परंपराओं के अनुसार, ग्रहण काल में किसी भी प्रकार का शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किया जाता, क्योंकि इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता है।


ग्रहण का समय और अवधि

ज्योतिषाचार्य पंडित राज मिश्रा के अनुसार, भारतीय समयानुसार यह सूर्य ग्रहण दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर शुरू होगा और शाम 7 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगा। इसकी कुल अवधि लगभग 4 घंटे 32 मिनट रहेगी। यह वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसे विज्ञान की भाषा में “रिंग ऑफ फायर” कहा जाता है। इस स्थिति में चंद्रमा पृथ्वी से अधिक दूरी पर होने के कारण सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता और उसके चारों ओर अग्नि की अंगूठी जैसी चमक दिखाई देती है। हालांकि, यह अद्भुत नजारा भारत में दिखाई नहीं देगा। इसी वजह से भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।


इन देशों में दिखेगा सूर्य ग्रहण

यह सूर्य ग्रहण जिम्बाब्वे, दक्षिण अफ्रीका, जाम्बिया, मॉरीशस, तंजानिया, अर्जेंटीना और चिली जैसे देशों में देखा जा सकेगा। इसके अलावा दक्षिण अटलांटिक महासागर, दक्षिणी प्रशांत महासागर और अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों में भी यह आंशिक रूप से नजर आएगा। वहीं भारत, श्रीलंका, नेपाल, अफगानिस्तान, म्यांमार, संयुक्त अरब अमीरात सहित एशिया के कई देशों, यूरोप, उत्तरी अमेरिका के अधिकांश हिस्सों, मध्य एवं उत्तरी अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में यह दिखाई नहीं देगा।


ज्योतिषीय दृष्टि से खास संयोग

ज्योतिषियों के अनुसार, यह सूर्य ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लग रहा है। करीब 64 वर्षों बाद कुंभ राशि में सूर्य और राहु की युति बन रही है, जिसे विशेष संयोग माना जा रहा है। साथ ही कुंभ राशि में चतुर्ग्रही योग का निर्माण हो रहा है। काल पुरुष कुंडली के प्रथम भाव के स्वामी मंगल उच्च अवस्था में गोचर कर रहे हैं, जो ऊर्जा और निर्णय क्षमता को मजबूत करने वाला माना जाता है। 


देवगुरु बृहस्पति भी इस वर्ष विशेष स्थिति में रहेंगे और लगभग 12 वर्षों बाद अपनी उच्च राशि में प्रवेश करेंगे। भले ही यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, लेकिन खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से यह वर्ष 2026 की एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता