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Bihar vigilance action : भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई, SVU ने अनुमंडल कृषि पदाधिकारी और ड्राइवर को रिश्वत लेते किया गिरफ्तार

मुजफ्फरपुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने अनुमंडल कृषि पदाधिकारी और उनके ड्राइवर को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया।

Bihar vigilance action : भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई, SVU ने अनुमंडल कृषि पदाधिकारी और ड्राइवर को रिश्वत लेते किया गिरफ्तार
Tejpratap
Tejpratap
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Bihar vigilance action :  

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने मुजफ्फरपुर में रिश्वतखोरी के मामले में अनुमंडल कृषि पदाधिकारी सह प्रभारी जिला कृषि पदाधिकारी हिमांशु कुमार और उनके ड्राइवर रामबाबू राय को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई से कृषि विभाग में हड़कंप मच गया है और इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है।


जानकारी के अनुसार, एसवीयू कार्यालय में एक परिवादी ने लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि हिमांशु कुमार खाद दुकानों की जांच के नाम पर दुकानदारों को डराते थे और लाइसेंस रद्द करने की धमकी देकर उनसे पैसे की मांग करते थे। आरोप था कि हिमांशु कुमार अपने ड्राइवर रामबाबू राय के माध्यम से 50 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहे थे। शिकायत मिलने के बाद एसवीयू ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी प्रारंभिक जांच कराई।


प्रारंभिक जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद एसवीयू ने इस मामले में ठोस कार्रवाई करने का निर्णय लिया। पुलिस उपाधीक्षक बिंदेश्वर प्रसाद और पुलिस उपाधीक्षक सुधीर कुमार के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया। टीम ने पूरी योजना के तहत जाल बिछाया और शिकायतकर्ता के सहयोग से रिश्वत लेने की प्रक्रिया पर नजर रखी।


छापेमारी के दौरान 17 फरवरी 2026 को जब आरोपी हिमांशु कुमार और उनके ड्राइवर रामबाबू राय 50 हजार रुपये रिश्वत ले रहे थे, उसी दौरान एसवीयू की टीम ने उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। इस कार्रवाई के बाद संबंधित विभागों में हलचल तेज हो गई है और अधिकारियों के बीच भी सतर्कता बढ़ गई है।


इस मामले में एसवीयू थाना कांड संख्या 6/26, दिनांक 17 फरवरी 2026 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की गई है। कानून के अनुसार, रिश्वत मांगना और लेना गंभीर अपराध माना जाता है और दोष सिद्ध होने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। एसवीयू अधिकारियों ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और इसमें अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।


भ्रष्टाचार के खिलाफ इस कार्रवाई को सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा बताया जा रहा है। एसवीयू ने आम लोगों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी किसी कार्य के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित एजेंसियों को दें। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।


इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि निगरानी एजेंसियां अब भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं और दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगी। वहीं, इस गिरफ्तारी के बाद कृषि विभाग में कार्यरत अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच भी जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है।