ब्रेकिंग
बाथरूम में नहाते समय महिला का बनाया वीडियो, वायरल करने की धमकी देकर एक साल तक किया शारीरिक शोषण!कोर्ट में पेशी के दौरान जमुई कांड के आरोपी हरेराम को वकील ने जड़ा थप्पड़, भीड़ से बचाकर पुलिस ने पहुंचाया जेलपटना में पूर्व पार्षद और जन सुराज के कार्यकर्ता अनिल यादव को मारी गोली, अपार्टमेंट में घुसकर अपराधियों ने घटना को दिया अंजाम, अस्पताल में मिलने पहुंचे प्रशांत किशोर बिहार कैबिनेट का बड़ा फैसला: 2 अक्टूबर को बंदियों की रिहाई, शहीद की पत्नी को अनुकंपा पर नौकरी बिहार SI परीक्षा में बड़ा खेल, गया कॉलेज से प्रश्नपत्र की फोटो खींचकर सॉल्वर गैंग को भेजने वाला कर्मचारी गिरफ्तारबाथरूम में नहाते समय महिला का बनाया वीडियो, वायरल करने की धमकी देकर एक साल तक किया शारीरिक शोषण!कोर्ट में पेशी के दौरान जमुई कांड के आरोपी हरेराम को वकील ने जड़ा थप्पड़, भीड़ से बचाकर पुलिस ने पहुंचाया जेलपटना में पूर्व पार्षद और जन सुराज के कार्यकर्ता अनिल यादव को मारी गोली, अपार्टमेंट में घुसकर अपराधियों ने घटना को दिया अंजाम, अस्पताल में मिलने पहुंचे प्रशांत किशोर बिहार कैबिनेट का बड़ा फैसला: 2 अक्टूबर को बंदियों की रिहाई, शहीद की पत्नी को अनुकंपा पर नौकरी बिहार SI परीक्षा में बड़ा खेल, गया कॉलेज से प्रश्नपत्र की फोटो खींचकर सॉल्वर गैंग को भेजने वाला कर्मचारी गिरफ्तार

Sarhul Festival: घड़े से होती है बारिश की भविष्यवाणी,आदिवासी समाज की सांस्कृतिक धरोहर

Sarhul Festival : झारखंड के आदिवासी समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो प्रकृति की आराधना और पारंपरिक रीति-रिवाजों का प्रतीक है। इसे हर साल चैत्र माह में बड़े उत्साह के साथ मनाया ...

सरहुल पर्व, Sarhul Festival, झारखंड, Jharkhand, आदिवासी संस्कृति, Tribal Culture, प्रकृति पूजा, Nature Worship, पारंपरिक रीति-रिवाज, Traditional Rituals, वर्षा भविष्यवाणी, Rain Prediction, सरना स्थल,
प्रतीकात्मक तस्वीर
© Google
Nitish Kumar
Nitish Kumar
3 मिनट

Sarhul Festival: झारखंड के गुमला जिले में हर साल सरहुल पर्व को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार चैत्र माह में आता है और आदिवासी समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है। इस पर्व में प्रकृति की पूजा की जाती है, जो न केवल उनकी धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि उनकी सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति के प्रति आदर को भी दर्शाता है।


घड़ों से बारिश की भविष्यवाणी की अनूठी प्रथा

गुमला जिले में सरहुल पर्व के दौरान एक विशेष परंपरा निभाई जाती है, जिसमें घड़ों के माध्यम से बारिश की भविष्यवाणी की जाती है। इस दिन सुबह-सुबह आदिवासी समाज के पुजारी (पाहन) दो नए मिट्टी के घड़े नदी या कुएं से लाते हैं और उन्हें पूरी श्रद्धा और परंपरा के साथ सरना स्थल पर स्थापित किया जाता है। इन घड़ों को अरवा चावल और सिंदूर से सजाया जाता है, और यह पूरी प्रक्रिया अत्यंत सम्मान और आस्था के साथ संपन्न की जाती है। आपको बता दे कि सरहुल पूजा संपन्न होने के बाद घड़ों में भरे पानी का निरीक्षण किया जाता है। यदि घड़े का पानी अपनी मात्रा में स्थिर रहता है, तो इसे अच्छी वर्षा का संकेत माना जाता है। पूजा समाप्त होने के बाद इस चावल को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है और गांववासियों की समृद्धि और अच्छी फसल की प्रार्थना की जाती है।


एक प्राचीन परंपरा जो देती है पर्यावरण संरक्षण का संदेश

सरहुल पर्व केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देता है। इस अवसर पर लोग नदियों, तालाबों, जंगलों और धरती माता की पूजा करते हैं और उनके संरक्षण का संकल्प लेते हैं। यह परंपरा न केवल आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती है, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी सोचने को प्रेरित करती है। झारखंड के आदिवासी समाज की यह अनूठी परंपरा हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने और उसके महत्व को समझने का अवसर प्रदान करती है।





टैग्स