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21 अगस्त को मनाई जाएगी हरतालिका तीज, जानिए क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त

PATNA : भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरतालिका तीज मनाई जाती है. भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित यह व्रत भगवान शिव को अमरता प्रदान कराने वाले व्रत के रूप

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PATNA :  भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरतालिका तीज मनाई जाती है. भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित यह व्रत भगवान शिव को अमरता प्रदान कराने वाले व्रत के रूप में माना जाता है. विशेषकर महिलाओं में इस व्रत को लेकर खास उत्सुकता देखने को मिलती है. ऐसा माना जाता है कि सबसे पहले यह व्रत माता पार्वती ने भगवन शिव को प्राप्त करने के लिए रखा था इसलिए सुहागिन महिलाएं अपने पति के दीर्घायु के लिए और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए पूजा-अर्चना करती हैं. 


इस साल 21 अगस्त को हरतालिका तीज मनाई जाएगी. दरअसल, भाद्रपद की शुक्ल तृतीया को हस्त नक्षत्र में भगवान शिव और माता पार्वती के पूजन का विशेष महत्व है और हरतालिका तीज व्रत करने से महिलाओं को सौभाग्य की प्राप्ति होती है. मान्यताओं के अनुसार सुखद दांपत्य जीवन और मनचाहा वर प्राप्ति के लिए यह व्रत विशेष फलदायी है. व्रत करने वाले को मन में शुद्ध विचार रखने चाहिए. यह व्रत भाग्य में वृद्धि करने वाला माना गया है. इस व्रत के प्रभाव से घर में सुख शांति और समृद्धि आती है. नकारात्मक विचारों का नाश होता है.


गौरतलब है कि इस व्रत को सबसे कठिन माना जाता है. यह व्रत निराहार और निर्जला किया जाता है और इस व्रत में व्रती को शयन निषेध है. इस व्रत में सायं के पश्चात चार प्रहर की पूजा करते हुए रातभर भजन-कीर्तन, जागरण किया जाता है. दूसरे दिन सुबह सूर्योदय के समय व्रत संपन्न होता है. इस व्रत में जल ग्रहण नहीं किया जाता है. व्रत के बाद अगले दिन जल ग्रहण करने का विधान है. यह व्रत करने पर इसे छोड़ा नहीं जाता है. बताया जाता है कि प्रत्येक वर्ष इस व्रत को विधि-विधान से करना चाहिए. इस व्रत में कथा का विशेष महत्व है. कथा के बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है.


हरितालिका तीज पूजा मुहूर्त : सुबह 5 बजकर 54 मिनट से सुबह 8 बजकर 30 मिनट तक और शाम 6 बजकर 54 मिनट से रात 9 बजकर 6 मिनट तक. 

तृतीया तिथि प्रारंभ : 21 अगस्त की रात 02 बजकर 13 मिनट से.

तृतीया तिथि समाप्त : 22 अगस्त रात 11 बजकर 2 मिनट तक.