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हरतालिका तीज पर भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें.. पूजा और व्रत से जुड़े नियम

Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं। जानें 14 सितंबर को मनाई जाने वाली तीज पर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और किन गलतियों से बचना चाहिए।

Hartalika Teej 2026
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Mukesh Srivastava
5 मिनट

Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाएं इस दिन पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार यह व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। इस बार हरतालिका तीज 14 सितंबर को मनाई जाएगी।



हरतालिका तीज के व्रत और पूजा से जुड़ी कई मान्यताएं हैं। ऐसे में व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए जरूरी है कि वे पूजा के दौरान अपनी श्रद्धा और परंपराओं के अनुसार नियमों का पालन करें। आइए जानते हैं कि इस दिन किन बातों का विशेष ध्यान रखा जाता है।



काले रंग के कपड़े पहनने से बचने की मान्यता

हरतालिका तीज पर सुहागिन महिलाओं के सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन लाल, हरे या अन्य शुभ रंगों के वस्त्र पहनने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लाल रंग को सुहाग और शुभता का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से कई परिवारों में तीज के दिन काले रंग के कपड़े या चूड़ियां पहनने से बचने की परंपरा है। महिलाएं अपनी पसंद और पारिवारिक परंपरा के अनुसार लाल रंग की साड़ी, चूड़ियां और अन्य श्रृंगार सामग्री का इस्तेमाल कर सकती हैं।



व्रत के दौरान मन को शांत रखें

हरतालिका तीज के दिन मन को शांत और सकारात्मक रखने की सलाह दी जाती है। व्रत रखने वाली महिलाओं को परिवार के सदस्यों के साथ अनावश्यक बहस या विवाद से बचने की मान्यता है। पूजा-पाठ के दौरान सकारात्मक भाव बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव लेने के बजाय दिन को पूजा, भक्ति और परिवार के साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण में बिताना बेहतर माना जाता है।



दिन में सोने से बचने की मान्यता

हरतालिका तीज का व्रत कठिन व्रतों में शामिल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्जला व्रत रखने के साथ रात में जागरण करने की परंपरा भी है। इसी कारण व्रती महिलाओं को दिन में सोने से बचने की सलाह दी जाती है। खाली समय में भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण, भजन या मंत्र जाप किया जा सकता है। हालांकि, निर्जला व्रत स्वास्थ्य के लिहाज से कठिन हो सकता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और किसी बीमारी से पीड़ित लोगों को अपनी स्वास्थ्य स्थिति को प्राथमिकता देनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।



स्वास्थ्य के अनुसार ही व्रत का संकल्प लें

धार्मिक मान्यताओं में हरतालिका तीज के व्रत को संकल्प से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में व्रत शुरू करने से पहले अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है। यदि किसी बीमारी या विशेष परिस्थिति के कारण निर्जला व्रत रखना संभव न हो, तो स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है। ऐसी स्थिति में परिवार के बड़े-बुजुर्ग या पुरोहित से सलाह लेकर अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार पूजा की जा सकती है।



सबसे पहले करें गणेश जी का स्मरण

हरतालिका तीज की पूजा में सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करने की परंपरा है। हिंदू धर्म में गणेश जी को प्रथम पूज्य माना जाता है। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा के बाद हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनने या पढ़ने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ शिव-पार्वती की पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख, शांति और सौभाग्य की कामना पूरी होती है।



श्रद्धा और नियमों के साथ करें पूजा

हरतालिका तीज का व्रत सुहाग की रक्षा और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।



डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। हम इन मान्यताओं की पूर्ण सत्यता या सटीकता का दावा नहीं करते हैं। व्रत रखने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखें और आवश्यकता होने पर चिकित्सक, पुरोहित या संबंधित विशेषज्ञ की सलाह लें।

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता