Bihar Politics: बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने शिक्षक और स्नातक कोटे की छह सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। पार्टी की ओर से एकमुश्त उम्मीदवारों की घोषणा के बाद लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने प्रत्याशियों के चयन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पार्टी में लंबे समय से सक्रिय नेताओं और कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर चुनाव से पहले पार्टी में आए नेताओं को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया है।
रोहिणी ने एक्स पर लिखा, “वैचारिक निष्ठा और लंबे संघर्ष को दरकिनार कर ऐन चुनाव (विधान परिषद चुनाव ) से पहले आए अवसरवादी चेहरों को प्राथमिकता देना समर्पित नेताओं - कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों का घोर अनादर है। दशकों तक लाठियां खाकर पार्टी और संगठन को सींचने वाले नेताओं को दरकिनार करना राजद के आंतरिक लोकतंत्र और जमीनी कैडर के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। यह निर्णय न केवल निष्ठावान लालूवादियों के साथ वादाखिलाफी है, बल्कि लालू जी की विचारधारा, पार्टी के मूल सिद्धांतों और संगठन की मजबूती पर भी गहरा आघात है।”
बिहार की 8 सीटों पर होने वाले एमएलसी चुनाव के लिए राजद ने शिक्षक कोटे की पटना सीट से परबत्ता के पूर्व विधायक डॉ. संजीव कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है। डॉ. संजीव कुमार सिंह विधानसभा चुनाव से पहले जदयू छोड़कर राजद में शामिल हुए थे। वहीं, पटना स्नातक सीट से दिलीप कुमार को प्रत्याशी बनाया गया है।
पार्टी ने अन्य सीटों के लिए भी उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की है। कोसी स्नातक सीट से नितेश कुमार, दरभंगा स्नातक सीट से अनिल कुमार झा, तिरहुत शिक्षक सीट से डॉ. रश्मि विनायक गौतम और सारण शिक्षक सीट से प्रो. जयराम यादव को टिकट दिया गया है।
उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर पार्टी के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वैचारिक निष्ठा और लंबे समय तक पार्टी के लिए संघर्ष करने वाले नेताओं की अनदेखी कर चुनाव से ठीक पहले पार्टी में आए अवसरवादी चेहरों को प्राथमिकता दी जा रही है।
रोहिणी आचार्य ने कहा कि दशकों से पार्टी के लिए संघर्ष करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा संगठन के आंतरिक लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। उनके मुताबिक, ऐसे फैसले समर्पित नेताओं और कार्यकर्ताओं के सम्मान को प्रभावित करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला न केवल निष्ठावान ‘लालूवादियों’ के साथ वादाखिलाफी है, बल्कि लालू प्रसाद यादव की विचारधारा, पार्टी के मूल सिद्धांतों और संगठन की मजबूती के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।
गौरतलब है कि राजद ने इन विधान परिषद चुनावों के लिए पहली बार एकमुश्त प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की है। पार्टी के इस कदम को चुनावी रणनीति और संगठनात्मक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, प्रत्याशियों की घोषणा के तुरंत बाद पार्टी के भीतर से उठे सवालों ने राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि राजद नेतृत्व रोहिणी आचार्य की आपत्तियों पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है।





