Kanwar Yatra 2026: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में सावन के दौरान हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर जा रहे कांवड़ियों के बीच एक अनोखी कांवड़ लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस कांवड़ को अलग-अलग मूल्यवर्ग के नोटों से सजाया गया है। कांवड़ पर 500, 200, 100, 50 और 10 रुपये के नोट लगाए गए हैं।
बताया जा रहा है कि एक कांवड़ को करीब 2 लाख 70 हजार रुपये के नोटों से सजाया गया है, जबकि दूसरी कांवड़ पर लगभग 50 हजार रुपये के नोट लगाए गए हैं। रास्ते से गुजरते समय इन कांवड़ों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं। कई लोग इन्हें देखने के साथ छूने के लिए भी पहुंच रहे हैं।
कांवड़िया मोनू ने बताया कि उनकी 2 लाख 70 हजार रुपये की कांवड़ को तैयार करने में करीब दो दिन का समय लगा। इसमें 500, 200, 100, 50 और 10 रुपये के नोट लगाए गए हैं। उनकी टीम इस कांवड़ को हरिद्वार से जगाधरी-यमुनानगर तक लेकर जाएगी।
मोनू के साथ करीब 10 कांवड़ियों की टीम है। उनके मुताबिक, वह पिछले चार साल से नोटों से सजी कांवड़ लेकर जा रहे हैं। यह उनकी चौथी ऐसी कांवड़ है। पहली बार उन्होंने करीब एक लाख रुपये के नोटों से कांवड़ सजाई थी। इसके बाद यह रकम बढ़कर करीब डेढ़ लाख, फिर ढाई लाख और अब 2.70 लाख रुपये तक पहुंच गई है। मोनू ने बताया कि अगली बार उनका करीब 5 लाख रुपये के नोटों से कांवड़ सजाने का इरादा है।
मोनू के मुताबिक, वह अक्सर बड़ी-बड़ी कांवड़ और बड़े DJ सेटअप देखते थे। इसी से उनके मन में कुछ अलग करने का विचार आया और उन्होंने नोटों से कांवड़ सजाने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की कांवड़ के जरिए वह कुछ अलग करना चाहते हैं और अपने देश का नाम रोशन करने की कोशिश कर रहे हैं।
नोटों से सजी कांवड़ को देखने के लिए रात के समय भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। कई लोग कांवड़ को छूने के लिए भी आगे आते हैं। ऐसे में इसकी सुरक्षा कांवड़ियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
मोनू ने बताया कि कांवड़ की निगरानी के लिए टीम के सदस्यों को रात में बारी-बारी से जागना पड़ता है। कई बार उन्हें सुबह करीब चार बजे तक कांवड़ की सुरक्षा करनी पड़ती है। उनकी दूसरी कांवड़ भी करीब 50 हजार रुपये के नोटों से तैयार की गई है।
जगदीप नाम के एक अन्य कांवड़िए की कांवड़ भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। उन्होंने बताया कि उनकी कांवड़ पर करीब 50 हजार रुपये के नोट लगाए गए हैं और इसे तैयार करने में लगभग डेढ़ दिन का समय लगा।
उन्होंने बताया कि कांवड़ की सुरक्षा के लिए टीम के सदस्य रात में बारी-बारी से निगरानी करते हैं। एक कांवड़िया जागता है तो दूसरा आराम करता है और उसके बाद तीसरा निगरानी की जिम्मेदारी संभालता है। इस तरह पूरी रात कांवड़ की सुरक्षा की जाती है।
नोटों से सजी कांवड़ों की सुरक्षा के लिए उत्तर प्रदेश में प्रवेश करने के बाद पुलिसकर्मी भी लगातार कांवड़ियों के साथ चल रहे हैं। जिस थाना क्षेत्र से कांवड़ गुजरती है, वहां की पुलिस उसे अगली पुलिस चौकी तक सुरक्षा देती है। इसके बाद अगले क्षेत्र की पुलिस जिम्मेदारी संभाल लेती है।
कांवड़ियों ने यूपी पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था की तारीफ की है। मोनू ने कहा कि उत्तराखंड से निकलने के बाद उत्तर प्रदेश में पुलिस की व्यवस्था उन्हें बेहतर लगी। पुलिसकर्मी लगातार उनके साथ चल रहे हैं और अगली चौकी तक सुरक्षित पहुंचा रहे हैं। जगदीप ने बताया कि उनकी टीम के साथ भी दो पुलिसकर्मी चल रहे हैं, ताकि कांवड़ को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।
कांवड़ियों की टीम 5 अगस्त को हरिद्वार से रवाना हुई थी और उनका 9 अगस्त तक जगाधरी-यमुनानगर पहुंचने का लक्ष्य है। इस यात्रा के दौरान नोटों से सजी कांवड़ की सुरक्षा उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। हालांकि, पुलिस की लगातार मौजूदगी से कांवड़िए राहत महसूस कर रहे हैं। सहारनपुर से गुजरते समय नोटों से सजी इन कांवड़ों ने लोगों के बीच खासा आकर्षण पैदा किया है और राहगीर इन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में रुक रहे हैं।





