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Makar Sankranti 2026: 14 या 15 जनवरी, कब है मकर संक्रांति? दूर कर लीजिए सारा कन्फ्यूजन

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति 2026 की सही तिथि को लेकर भ्रम दूर हो गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार उदयातिथि के आधार पर मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। इसी दिन स्नान-दान, खिचड़ी और तिल का दान शास्त्रसम्मत माना जाएगा।

Makar Sankranti 2026
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति की तिथि को लेकर लोगों के बीच काफी असमंजस बना हुआ है। कुछ लोगों का मानना है कि मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी, जबकि कुछ के अनुसार 15 जनवरी को संक्रांति मनाना अधिक शुभ रहेगा। ऐसे में आइए वाराणसी के ज्योतिषाचार्यों की राय से जानते हैं कि मकर संक्रांति की सही तिथि क्या है।


इस वर्ष मकर संक्रांति को लेकर केवल तिथि ही नहीं, बल्कि चावल दान और खिचड़ी के सेवन को लेकर भी लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। दरअसल, 14 जनवरी 2026, बुधवार को मकर संक्रांति की तिथि पड़ रही है, लेकिन इस दिन एकादशी तिथि भी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन चावल का सेवन और दान वर्जित माना जाता है, इसी कारण लोग असमंजस में हैं।


इस विषय में वाराणसी के एक प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि 14 जनवरी की रात 9 बजकर 35 मिनट पर सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। चूंकि यह संक्रांति रात्रि में घटित हो रही है, इसलिए उदयातिथि के अनुसार इसका मान अगले दिन यानी 15 जनवरी को माना जाएगा। 


इसी कारण सभी प्रकार के दान-पुण्य, पूजन-पाठ और धार्मिक कार्य 15 जनवरी को करना ही फलदायी रहेगा। विशेष पर्वों में तिथि का महत्व दिन से अधिक होता है, इसलिए 15 जनवरी को मकर संक्रांति (खिचड़ी पर्व) मनाना शास्त्रसम्मत है और इसी दिन खिचड़ी का दान व सेवन किया जा सकता है।


पंडितों के मुताबिक, उदयातिथि के आधार पर मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी। इस दिन का पुण्यकाल प्रातः 7 बजकर 15 मिनट से सुबह 8 बजे तक रहेगा। हालांकि, शास्त्रों के अनुसार दोपहर 12 बजे तक भी पुण्यकाल माना जा सकता है। इस दौरान स्नान-दान, तिल दान, चावल दान और खिचड़ी दान किया जा सकता है।


इस वर्ष सूर्य 14 जनवरी की रात 9 बजकर 49 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं। चूंकि यह परिवर्तन रात्रि में हो रहा है, इसलिए पंचांगों के अनुसार उसी दिन पर्व नहीं मनाया जाता। सूर्य से जुड़े पर्वों का निर्णय सूर्योदय के आधार पर किया जाता है। सूर्योदय के बाद मिलने वाले आठ घंटों को संक्रांति काल माना जाता है, और इसी अवधि में विधि-विधान से मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इसलिए मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जानी चाहिए।


मकर संक्रांति से जुड़ी कई धार्मिक परंपराएं हैं। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है। दान का विशेष महत्व है, जिसमें अन्न, वस्त्र और आवश्यकता की वस्तुएं गरीबों को दी जाती हैं। इसके साथ ही सूर्य पूजा की जाती है, जिसमें सूर्य देव को जल, फूल, तिल, गुड़ और चावल अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

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