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Mahashivratri Kab Hai: महाशिवरात्रि 2026 कब है? दूर कर लीजिए सभी कंफ्यूजन; जानिए.. पार्थिव शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Mahashivratri Kab Hai: महाशिवरात्रि 2026 पर पार्थिव शिवलिंग पूजन का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि। इस दिन पूजा करने से धन, स्वास्थ्य, पुत्र और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

Mahashivratri Kab Hai
प्रतिकात्मक तस्वीर
© Google
Mukesh Srivastava
2 मिनट

Mahashivratri Kab Hai: सनातन परंपरा में भगवान शिव की पूजा को महाशिवरात्रि पर विशेष फलदायी माना गया है। इस दिन चार प्रकार की पूजा का विशेष महत्व है। इसके अलावा, घर पर या पवित्र स्थान पर पार्थिव शिवलिंग का पूजन करने को अत्यंत शुभ बताया गया है।


पार्थिव शिवलिंग मिट्टी, आटा, गाय के गोबर, फूल, कनेरपुष्प, फल, गुड़, मक्खन, भस्म या अन्न से बनाया जा सकता है। इसे नदी, तालाब के किनारे, शिवालय या किसी पवित्र स्थान पर स्थापित कर पूजन करना चाहिए। इस दौरान मिट्टी को दूध से शुद्ध करना, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर शिवलिंग बनाना और अंगुल से अधिक ऊँचा न रखना आवश्यक है।


शिव महापुराण में उल्लेख है कि पार्थिव शिवलिंग से पूजन करने वाले को धन, धान्य, आरोग्य और पुत्र की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, पार्थिव पूजन से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है। महिला और पुरुष दोनों इसे कर सकते हैं। फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इस वर्ष 15 फरवरी 2026 को चतुर्दशी तिथि शाम से शुरू होगी और 16 फरवरी को आधे दिन तक रहेगी। इसलिए व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा।


भगवान शिव की पूजा अधिकतर प्रदोष काल में होती है, यानी सुबह और शाम के समय। इसके अलावा निशीथ काल में जागरण करके शिव पूजन करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस वर्ष निशीथ काल 15 फरवरी रात 11:52 बजे से 16 फरवरी पूर्वाह्न 12:42 बजे तक रहेगा। इस दौरान शिवलिंग पर चढ़ाई गई चीजें ग्रहण न करें। पूजा का पुण्य तभी मिलता है जब पार्थिव शिवलिंग सावधानीपूर्वक बनाया गया हो।


चार पहर का समय:

पहला प्रहर: शाम 06:01 – रात 09:09

दूसरा प्रहर: रात 09:09 – 16 फरवरी 00:17

तीसरा प्रहर: 16 फरवरी 00:17 – 03:25

चौथा प्रहर: 16 फरवरी 03:25 – 06:33


डिस्क्लेमर: इस समाचार में दी गई जानकारियों को पूर्णतः सटीक नहीं माना जा सकता। विस्तृत जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श करना आवश्यक है।

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता