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Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि कब मनाया जा रहा, महत्व और शुभ मंत्र जानें

महाशिवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे भगवान शिव की उपासना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष रूप से मनाया जाता है। यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Feb 20, 2025, 7:39:06 AM

Mahashivratri

Mahashivratri - फ़ोटो Mahashivratri

Mahashivratri 2025: फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस साल महाशिवरात्रि का त्योहार 26 फरवरी 2025 को मनाया जाएगा। यह पर्व भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। शिवभक्त इस दिन व्रत, रात्रि जागरण और शिव पूजन कर भगवान शिव की कृपा प्राप्त करते हैं।


महाशिवरात्रि का महत्व

महाशिवरात्रि का पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यह रात शिवभक्तों के लिए विशेष फलदायी मानी जाती है, क्योंकि इस दिन शिव जी का पूजन करने से समस्त कष्टों का निवारण होता है और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।


महाशिवरात्रि पर किए जाने वाले शुभ मंत्रों का जाप

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार, भगवान शिव के कुछ विशेष मंत्रों का जाप करने से जीवन की अनेक समस्याएं दूर होती हैं। विशेषकर नौकरी, शिक्षा और करियर से जुड़ी परेशानियों को दूर करने के लिए युवा इन मंत्रों का जाप अवश्य करें।


1. विद्यार्थियों के लिए मंत्र

मंत्र: “ऊं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नम:”

जाप की संख्या: 21 बार

लाभ: इस मंत्र का जाप करने से विद्यार्थी शिक्षा और करियर में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। यह मंत्र विद्या, ज्ञान और बुद्धि को बढ़ाने में सहायक होता है।


2. मानसिक शांति और शिव कृपा के लिए मंत्र

मंत्र: “ॐ नमः शिवाय”

जाप की संख्या: कम से कम 108 बार

लाभ: यह भगवान शिव का सबसे प्रभावशाली पंचाक्षरी मंत्र है। इसका जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।


3. मनोकामना पूर्ति के लिए रुद्र मंत्र

मंत्र: “ॐ नमो भगवते रुद्राय नमः”

लाभ: इस मंत्र को भगवान शिव का रुद्र मंत्र कहा जाता है। महाशिवरात्रि के दिन इस मंत्र का जाप करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।


4. कष्टों और संकटों से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय मंत्र

मंत्र: “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥”

जाप की संख्या: 108 बार

लाभ: इस मंत्र के जाप से जीवन में आने वाले संकटों से मुक्ति मिलती है और स्वास्थ्य से संबंधित परेशानियां दूर होती हैं। यह मंत्र अकाल मृत्यु से रक्षा करने के लिए भी प्रभावी माना जाता है।


महाशिवरात्रि व्रत और पूजन विधि

प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाएं।

धूप-दीप जलाकर भगवान शिव का विधिपूर्वक पूजन करें।

रात्रि जागरण करें और चारों प्रहर की पूजा करें।

शिव मंत्रों का जाप करें और भगवान शिव की आरती करें।


महाशिवरात्रि भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा पर्व है। इस दिन उपवास रखने और विशेष मंत्रों का जाप करने से जीवन की समस्त बाधाएं दूर होती हैं। शिवभक्त इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मोक्ष की प्राप्ति कर सकते हैं। इस पावन अवसर पर भगवान शिव की कृपा से सभी भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आए, यही कामना है।