Chhath Puja 2025: प्रकृति, भक्ति और कृतज्ञता का संगम, जानें क्यों खास है सूर्य देव को दिया जाने वाला अर्घ्य?

Chhath Puja 2025: छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित चार दिन का पवित्र त्योहार माना जाता है, जो कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 25 से 28 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। इसके तीन मुख्य अनुष्ठान - खरना, शाम का अर्घ्य और सुबह

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Oct 14, 2025, 2:17:25 PM

Chhath Puja

Chhath Puja - फ़ोटो GOOGLE

Chhath Puja 2025: छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित चार दिन का पवित्र त्योहार माना जाता है, जो कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 25 से 28 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। इसके तीन मुख्य अनुष्ठान - खरना, शाम का अर्घ्य और सुबह का अर्घ्य होते हैं। हर एक रस्म का अपना अलग महत्व और श्रद्धा से जुड़ा संदेश होता है, जाने क्या है महत्त्व- 


छठ: प्रकृति और भक्ति का संगम

छठ पूजा बिहार, झारखंड और पूर्वी भारत का प्रमुख पर्व है, जो सूर्य देव और छठी मैया की उपासना के लिए मनाया जाता है। यह त्योहार प्रकृति और आस्था का सुंदर मेल है। साल 2025 में छठ पूजा 25 अक्टूबर से शुरू होगी — हाय-खाय 25 अक्टूबर, खरना 26 अक्टूबर, संध्या अर्घ्य 27 अक्टूबर और उषा अर्घ्य 28 अक्टूबर को मनाया जाएगा। यह व्रत बिना पानी पिए रखने वाला कठोर व्रत है, जो शुद्धता, भक्ति और कृतज्ञता का संदेश देता है।


खरना का महत्व

छठ पूजा का दूसरा दिन "खरना" कहलाता है। इस दिन व्रती पूरे दिन बिना पानी पिए व्रत रखते हैं। शाम को सूर्यास्त के बाद गुड़ की खीर, रोटी और फल का प्रसाद बनाकर उसे ग्रहण किया जाता है। माना जाता है कि यह छठी मैया को प्रसन्न करता है, जो संतान की रक्षा और लंबी उम्र का आशीर्वाद देती हैं। खरना पवित्रता और संकल्प का प्रतीक है और यह घर-परिवार में शांति लाने वाला माना जाता है।


संध्या अर्घ्य: डूबते सूर्य को नमस्कार

तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। वे कमर तक जल में खड़े होकर दूध, जल, फल और ठेकुआ अर्पित करते हैं। यह परंपरा सूर्य की ऊर्जा और आशीर्वाद पाने का प्रतीक है। इस समय घाटों पर लोकगीत गाए जाते हैं और पूरा माहौल भक्ति से भर जाता है।


संध्या अर्घ्य का महत्व

संध्या अर्घ्य सूर्य की अंतिम किरणों का स्वागत करने का अवसर है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मकता लाता है। ज्योतिष के अनुसार, यह स्वास्थ्य और समृद्धि का योग बनाता है। माना जाता है कि छठी मैया की कृपा से बच्चे निरोग और दीर्घायु होते हैं। यह अनुष्ठान पर्यावरण की शुद्धि और लोगों में एकता को भी बढ़ावा देता है।


उषा अर्घ्य: उगते सूर्य को अर्पण

अंतिम दिन यानी सप्तमी को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। व्रती जल और दूध अर्पित कर सूर्य देव का आशीर्वाद मांगते हैं। अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण (समापन) प्रसाद ग्रहण करके किया जाता है। यह दिन नई शुरुआत और जीवन की पवित्रता का प्रतीक है।


उषा अर्घ्य का महत्व

उषा अर्घ्य जीवन में नई ऊर्जा और उम्मीद का प्रतीक माना जाता है। यह स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि प्रदान करता है। यह सामूहिक पूजा लोगों के बीच एकता और सद्भाव बढ़ाती है। छठ पूजा के तीन प्रमुख चरण — खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य — क्रमशः संकल्प, कृतज्ञता और नई ऊर्जा के प्रतीक हैं। यह पर्व प्रकृति से जुड़ने और भक्ति के साथ जीवन को शुद्ध करने का संदेश देता है।