ब्रेकिंग
भागलपुर में अवैध संबंध का खौफनाक अंजाम: बहू ने प्रेमी संग मिलकर ससुर की कराई हत्या, 4 गिरफ्तारफर्स्ट बिहार की खबर का बड़ा असर: स्वास्थ्य विभाग के संज्ञान लेने के बाद प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने दिया यह जवाबदिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा आदेश: यात्रियों को सीट तक पहुंचाने की जिम्मेवारी रेलवे की, मुआवजा देना अनिवार्यज्योति सिंह ने भोलेनाथ से मां बनने की मांगी मन्नत, बोलीं..चाहिए खुशहाल जिंदगीपटना में नशे के कारोबार पर बड़ा प्रहार: 45 करोड़ से अधिक के ड्रग्स बरामद, नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजाभागलपुर में अवैध संबंध का खौफनाक अंजाम: बहू ने प्रेमी संग मिलकर ससुर की कराई हत्या, 4 गिरफ्तारफर्स्ट बिहार की खबर का बड़ा असर: स्वास्थ्य विभाग के संज्ञान लेने के बाद प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने दिया यह जवाबदिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा आदेश: यात्रियों को सीट तक पहुंचाने की जिम्मेवारी रेलवे की, मुआवजा देना अनिवार्यज्योति सिंह ने भोलेनाथ से मां बनने की मांगी मन्नत, बोलीं..चाहिए खुशहाल जिंदगीपटना में नशे के कारोबार पर बड़ा प्रहार: 45 करोड़ से अधिक के ड्रग्स बरामद, नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा

आखिर मां बगलामुखी क्यों खींचती हैं शत्रु की जीभ? जानिए इसके पीछे का रहस्य

Baglamukhi Jayanti 2026: मां बगलामुखी जयंती के अवसर पर भक्त उनके उग्र स्वरूप और प्रतीकात्मक चित्रों के पीछे छिपे आध्यात्मिक अर्थ को समझते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां का यह स्वरूप शत्रु की वाणी को नियंत्रित करने और नकारात्मक शक्तियों...

आखिर मां बगलामुखी क्यों खींचती हैं शत्रु की जीभ? जानिए इसके पीछे का रहस्य
Ramakant kumar
3 मिनट

Baglamukhi Jayanti 2026: 24 अप्रैल को मनाई जाने वाली बगलामुखी जयंती के मौके पर मां बगलामुखी का स्वरूप एक बार फिर चर्चा में है। पीले वस्त्रों में सजी मां, एक हाथ से शत्रु की जीभ पकड़कर और दूसरे हाथ में गदा उठाए हुए, यह दृश्य जितना रहस्यमयी है, उतना ही गहरा इसका अर्थ भी छिपा है।


मां बगलामुखी, जिन्हें ‘पीतांबरा’ भी कहा जाता है, दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या मानी जाती हैं। उनका यह उग्र रूप सिर्फ शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक खास संदेश देता है, शत्रु की ताकत को वहीं खत्म कर देना, जहां से वह शुरू होती है।


पौराणिक कथा के अनुसार, सतयुग में एक समय ऐसा आया जब पूरी सृष्टि एक भयानक संकट में घिर गई। चारों ओर विनाशकारी तूफान था और देवता भी असहाय नजर आ रहे थे। इसी बीच मदन नाम का एक असुर अपनी तपस्या से ‘वाक्-सिद्धि’ का वरदान पा चुका था।


इस वरदान ने उसे बेहद खतरनाक बना दिया था। उसकी जुबान से निकला हर शब्द सच हो जाता था। धीरे-धीरे वह अहंकारी हो गया और अपनी वाणी के जरिए तबाही मचाने लगा। उसकी ताकत तलवार या अस्त्र में नहीं, बल्कि उसकी जुबान में बसती थी।


जब हालात बेकाबू हो गए, तब भगवान विष्णु ने समाधान के लिए तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर हरिद्रा सरोवर से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुईं, मां बगलामुखी। उनका तेज इतना प्रबल था कि चारों दिशाएं पीले प्रकाश से जगमगा उठीं।


जब मां का सामना मदन असुर से हुआ, तो वह अपने अहंकार में देवी को अपशब्द कहने लगा। जैसे ही उसने बोलना शुरू किया, मां बगलामुखी ने तुरंत उसकी जीभ पकड़ ली और उसे बाहर खींच लिया। उसी पल उसकी सारी शक्ति खत्म हो गई, वह न बोल सका, न कुछ कर सका।


यही वजह है कि मां बगलामुखी को शत्रु की जीभ खींचते हुए दिखाया जाता है। यह संकेत है कि वे दुश्मन की वाणी और उसकी नकारात्मक शक्ति को जड़ से खत्म कर देती हैं।


धार्मिक और तांत्रिक मान्यताओं के अनुसार, मां की यह ‘स्तंभन शक्ति’ शत्रु के हर गलत इरादे को रोक देती है। जो व्यक्ति आपके खिलाफ झूठ, षड्यंत्र या कटु शब्दों का इस्तेमाल करता है, उसकी ताकत को मां बगलामुखी वहीं रोक देती हैं।


आध्यात्मिक दृष्टि से यह और भी गहरा संदेश देती है, ‘जीभ’ हमारे अंदर के क्रोध, अहंकार और अनियंत्रित विचारों का प्रतीक है। मां बगलामुखी इन नकारात्मक भावनाओं को शांत कर साधक को सही मार्ग दिखाती हैं।


इसलिए जब भी आप मां बगलामुखी की तस्वीर में उन्हें शत्रु की जीभ खींचते देखें, तो समझ लीजिए कि यह सिर्फ एक चित्र नहीं, बल्कि एक शक्ति है, जो बुराई की आवाज को हमेशा के लिए शांत कर देती है।

टैग्स
इस खबर के बारे में

रिपोर्टर / लेखक

Ramakant kumar

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

संबंधित खबरें