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Purushottam Maas 2026: मलमास शुरू होते ही शुभ कार्यों पर विराम, इस तारीख तक नहीं होंगे विवाह और गृह प्रवेश

पुरुषोत्तम मास शुरू होने के साथ ही विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों पर अस्थायी रोक लग गई है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह समय पूजा-पाठ, दान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष माना जाता है। साथ ही इस बार कई प्रमुख पर्वों की तिथियों में भी बदलाव देखने को

Purushottam Maas 2026: मलमास शुरू होते ही शुभ कार्यों पर विराम, इस तारीख तक नहीं होंगे विवाह और गृह प्रवेश
Ramakant kumar
3 मिनट

Purushottam Maas 2026: 17 मई से पुरुषोत्तम मास की शुरुआत के साथ ही शादी-विवाह समेत सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग गई है। अब 15 जून तक विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, सगाई और अन्य शुभ कार्य नहीं किए जाएंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास को बेहद पवित्र माना जाता है और इस दौरान पूजा-पाठ, जप, तप तथा दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है।


ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इस बार ज्येष्ठ मास के बीच अधिकमास आने के कारण शुभ मुहूर्त कम हो गए हैं। इसके साथ ही गुरु और शुक्र ग्रह के अस्त होने तथा मासांत दोष के प्रभाव से विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम लग गया है। यही वजह है कि लगभग एक महीने तक शादियों की रौनक नहीं दिखाई देगी।


ज्योतिषाचार्य संजय पाठक के अनुसार अधिकमास करीब हर तीन साल में आता है। चंद्र और सौर गणना के बीच समय के अंतर को संतुलित करने के लिए यह अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। इसी कारण इस बार विक्रम संवत 2083 में कुल 13 महीने होंगे।


उन्होंने बताया कि पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस दौरान विष्णु सहस्रनाम का पाठ, भगवद्गीता का अध्ययन, व्रत, कथा-श्रवण और पूजा-अर्चना करना बेहद फलदायी माना गया है। मंदिरों में भी इस महीने भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों की संख्या बढ़ जाती है।


इस बार अधिकमास का असर कई प्रमुख त्योहारों की तारीखों पर भी पड़ेगा। रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, पितृपक्ष, शारदीय नवरात्र, दीपावली और छठ महापर्व पिछले वर्षों की तुलना में देर से मनाए जाएंगे।


ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि 16 जुलाई से 8 अगस्त तक गुरु तारा अस्त रहेगा, जिसकी वजह से इस अवधि में भी विवाह के शुभ मुहूर्त नहीं होंगे। वहीं 25 जुलाई से 20 नवंबर तक हरिशयन काल रहेगा। ऐसे में जून से दिसंबर तक बहुत सीमित दिनों में ही शादी-विवाह के शुभ अवसर मिल पाएंगे।


विवाह के प्रमुख शुभ मुहूर्त

जून: 19, 22, 27, 28, 29
जुलाई: 7, 8
नवंबर: 24, 25, 29
दिसंबर: 2, 3, 9


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास में किए गए दान-पुण्य और पूजा-पाठ का फल कई गुना अधिक मिलता है। यही कारण है कि इस दौरान श्रद्धालु धार्मिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
नोट: इस खबर की सत्यता की पुष्टि @FirstBihar नहीं करता है। अधिक जानकारी एवं सटीक सलाह के लिए संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श लें।