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ईद से पहले कुर्बानी पर सियासी संग्राम: ‘आग से ना खेलें शुभेंदु अधिकारी’, बंगाल के मुस्लिम नेता ने चेताया

Qurbani Controversy: पश्चिम बंगाल में पशु कुर्बानी और गोहत्या को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। विधायक हुमायूं कबीर ने राज्य सरकार के प्रतिबंधों को चुनौती देते हुए कहा कि धार्मिक परंपराओं के तहत कुर्बानी जारी रहेगी।

Qurbani Controversy
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Qurbani Controversy: पश्चिम बंगाल में ईद-उल-जुहा से पहले पशु कुर्बानी और गोहत्या को लेकर सियासी विवाद गहरा गया है। आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर ने राज्य सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि “कुरान में कुर्बानी का आदेश है और यह होकर रहेगी।”


हुमायूं कबीर ने प्रशासन पर धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय कुर्बानी के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी को चेतावनी देते हुए कहा, “आग से न खेलें, यह आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है।”


कबीर ने कहा कि सरकार मुसलमानों के बीफ खाने पर नियम बना सकती है, लेकिन धार्मिक अनुष्ठान के तौर पर होने वाली कुर्बानी को नहीं रोक सकती। उन्होंने दावा किया कि यह 1400 साल पुरानी परंपरा है और दुनिया रहने तक गाय, बकरी और ऊंट की कुर्बानी जारी रहेगी।


उन्होंने सड़क पर नमाज अदा करने पर लगी पाबंदियों पर भी नाराजगी जताई और कहा कि अगर ईद की नमाज के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं कराई गई, तो सड़कों पर अन्य धार्मिक आयोजनों की अनुमति भी नहीं दी जानी चाहिए।


इस बीच कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के गाय और भैंस के वध पर प्रतिबंध लगाया गया है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट की पुरानी टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि “गाय की कुर्बानी ईद-उल-जुहा का अनिवार्य हिस्सा नहीं है और इस्लाम में इसकी धार्मिक आवश्यकता नहीं मानी गई है।”


राज्य सरकार की 13 मई की अधिसूचना के अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पर सख्त रोक लगाई गई है। नियमों का उल्लंघन करने पर छह महीने तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।


बीजेपी की ओर से भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया आई है। बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि यह मामला कानून लागू करने और अवैध बूचड़खानों को रोकने से जुड़ा है। वहीं, मंत्री दिलीप घोष ने दावा किया कि गोहत्या का इस्लाम से कोई संबंध नहीं है और यह केवल हिंदू समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए की जाती है।


दूसरी ओर, फुरफुरा शरीफ के पीरजादा तोहा सिद्दीकी ने सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब भारत से बीफ एक्सपोर्ट की अनुमति है, तो देश के भीतर कुर्बानी पर रोक क्यों लगाई जा रही है। उन्होंने इसे दोहरा मापदंड बताया।


वहीं, बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने मुस्लिम समुदाय से गाय का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि गाय हिंदू धर्म में पूजनीय है, इसलिए उसकी कुर्बानी नहीं होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग भी की।

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता