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इस्तीफा नहीं दूंगी… लेकिन कुर्सी जाना तय! जानिए क्या है CM को कुर्सी से हटाने का नियम, इनके पास है पूरा पावर

पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। ‘नो इस्तीफा’ वाले बयान के बीच अब सबकी नजर संवैधानिक प्रक्रिया और आगे होने वाले सत्ता परिवर्तन पर टिकी है। पूरा मामला समझने के लिए आगे पढ़ें...

इस्तीफा नहीं दूंगी… लेकिन कुर्सी जाना तय! जानिए क्या है CM को कुर्सी से हटाने का नियम, इनके पास है पूरा पावर
Ramakant kumar
3 मिनट

पश्चिम बंगाल की राजनीति इस वक्त एक दिलचस्प और संवेदनशील मोड़ पर खड़ी है। ममता बनर्जी का ‘नो इस्तीफा’ वाला बयान सुर्खियों में है, लेकिन संवैधानिक सच्चाई यह है कि उनकी यह जिद अब ज्यादा देर टिकने वाली नहीं है। विधानसभा का कार्यकाल खत्म होते ही सत्ता का समीकरण अपने आप बदल जाएगा।


चुनाव नतीजों के बाद बदला सियासी माहौल

4 मई को आए चुनाव परिणामों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा ही बदल दी। भारतीय जनता पार्टी ने इस बार बड़ी जीत दर्ज करते हुए करीब 15 साल से सत्ता में काबिज तृणमूल कांग्रेस को बाहर का रास्ता दिखा दिया।


नतीजों के बाद ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतगणना में गड़बड़ी हुई और उन्हें “हराया गया” है। इसी के साथ उन्होंने साफ कहा कि वह इस्तीफा नहीं देंगी। यह बयान आते ही राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई।


7 मई के बाद अपने आप खत्म हो जाएगा कार्यकाल

असल खेल संविधान के नियमों में छिपा है। 7 मई 2026 को राज्य की 17वीं विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इसका मतलब साफ है—उस दिन के बाद मुख्यमंत्री और पूरी मंत्रिपरिषद का पद अपने आप समाप्त हो जाएगा।


यानी चाहे ममता बनर्जी इस्तीफा दें या न दें, 7 मई के बाद वह संवैधानिक रूप से मुख्यमंत्री नहीं रहेंगी। ऐसे में उनका ‘नो इस्तीफा’ वाला बयान केवल प्रतीकात्मक बनकर रह जाता है।


संविधान क्या कहता है?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 के अनुसार मुख्यमंत्री राज्यपाल की इच्छा तक पद पर रहते हैं, लेकिन इसके लिए विधानसभा का समर्थन जरूरी होता है। जब नई विधानसभा के चुनाव हो चुके हैं और नतीजे भी आ चुके हैं, तो पुरानी सरकार का बने रहना सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया होती है।


संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई मुख्यमंत्री इस्तीफा देने से इनकार करता है, तो राज्यपाल के पास उसे पद से हटाने का अधिकार होता है। हालांकि, आमतौर पर ऐसी स्थिति आने से पहले ही प्रक्रिया स्वतः पूरी हो जाती है।


क्या है ‘नो इस्तीफा’ बयान के पीछे की राजनीति?

विशेषज्ञों का कहना है कि ममता बनर्जी का यह बयान कानूनी से ज्यादा राजनीतिक है। यह उनके समर्थकों को संदेश देने और चुनावी नतीजों पर अपनी नाराजगी जताने का एक तरीका है। इसके अलावा, पिछले तीन महीनों से राज्य में आचार संहिता लागू थी, जिसके चलते सरकार की कार्यक्षमता पहले ही सीमित थी। ऐसे में व्यावहारिक रूप से भी सरकार का नियंत्रण प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ में था।


नई सरकार की तैयारी तेज

इधर भारतीय जनता पार्टी 10 मई से पहले नई सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारी में जुटी है। राज्यपाल जल्द ही बहुमत वाली पार्टी को सरकार बनाने का न्योता दे सकते हैं। ऐसे में साफ है कि आने वाले कुछ दिनों में पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

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