ब्रेकिंग
विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त होने से भागलपुर-पूर्णिया रूट पर यातायात ठप, नाव के सहारे सफरपटना में बदला CM आवास का नाम, 1 अणे मार्ग अब ‘लोक सेवक आवास’7 मई को मंत्रिमंडल का विस्तार, एक दिन पहले सम्राट चौधरी ने बुलाई कैबिनेट की बैठक, बड़े फैसलों की तैयारीविधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद भी नया इतिहास बनायेंगी ममता बनर्जी: बंगाल में खड़ा हो गया बड़ा संवैधानिक संकटकैबिनेट विस्तार से पहले अचानक JDU दफ्तर पहुंचे नीतीश कुमार, बोले संजय गांधी..उनके आने की जानकारी हम लोगों को भी नहीं थीविक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त होने से भागलपुर-पूर्णिया रूट पर यातायात ठप, नाव के सहारे सफरपटना में बदला CM आवास का नाम, 1 अणे मार्ग अब ‘लोक सेवक आवास’7 मई को मंत्रिमंडल का विस्तार, एक दिन पहले सम्राट चौधरी ने बुलाई कैबिनेट की बैठक, बड़े फैसलों की तैयारीविधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद भी नया इतिहास बनायेंगी ममता बनर्जी: बंगाल में खड़ा हो गया बड़ा संवैधानिक संकटकैबिनेट विस्तार से पहले अचानक JDU दफ्तर पहुंचे नीतीश कुमार, बोले संजय गांधी..उनके आने की जानकारी हम लोगों को भी नहीं थी

BJP strategy : अंग-बंग-कलिंग मिशन पर बीजेपी का कब्जा! बंगाल जीत के बाद बदलेगी देश की राजनीति, बिहार में शक्ति प्रदर्शन से फिर मिलेगा नया संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘अंग-बंग-कलिंग’ रणनीति अब जमीन पर दिखने लगी है। ओडिशा, बिहार और बंगाल में BJP की लगातार जीत ने देश की राजनीति की दिशा बदल दी है।

BJP strategy : अंग-बंग-कलिंग मिशन पर बीजेपी का कब्जा! बंगाल जीत के बाद बदलेगी देश की राजनीति, बिहार में शक्ति प्रदर्शन से फिर मिलेगा नया संदेश
Tejpratap
Tejpratap
5 मिनट

BJP strategy : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनीति में एक व्यापक नैरेटिव गढ़ते हुए ‘अंग-बंग-कलिंग’ की ऐतिहासिक अवधारणा को समकालीन राजनीति से जोड़ दिया है। बंगाल में जीत के जश्न के दौरान उनका यह संक्षिप्त उल्लेख केवल एक बयान नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक राजनीतिक रणनीति का संकेत माना जा रहा है। प्राचीन भारत में मगध साम्राज्य के अंतर्गत आने वाले अंग, बंग और कलिंग आज के बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के रूप में जाने जाते हैं। इन तीनों क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी की बढ़ती पकड़ को इसी ऐतिहासिक संदर्भ में देखा जा रहा है।


राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर डालें तो भाजपा ने अपनी रणनीति को चरणबद्ध तरीके से लागू किया। सबसे पहले कलिंग यानी ओडिशा में पार्टी ने मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। वर्ष 2024 के चुनाव में भाजपा ने बीजू जनता दल को कड़ी चुनौती देते हुए 147 में से 78 सीटें जीत लीं, जो बहुमत के आंकड़े से अधिक थीं। इसके साथ ही ओडिशा में पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनी और मोहन चरण मांझी को मुख्यमंत्री बनाया गया। यह जीत भाजपा के लिए पूर्वी भारत में एक मजबूत आधार तैयार करने वाली साबित हुई।


इसके बाद पार्टी का फोकस अंग देश यानी बिहार पर केंद्रित हुआ। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपने सहयोगियों—जदयू, लोजपा (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और अन्य दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा। कुल 243 सीटों में से एनडीए को 202 सीटों पर जीत मिली, जिसमें भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। हालांकि, इस जीत के बावजूद मुख्यमंत्री पद जदयू नेता नीतीश कुमार को दिया गया। लेकिन कुछ ही महीनों बाद राजनीतिक समीकरण बदले और सत्ता हस्तांतरण के तहत सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाया गया। यह बदलाव बेहद सहज तरीके से हुआ, जिससे भाजपा की दीर्घकालिक रणनीति का संकेत मिलता है।


बिहार के बाद भाजपा ने अपनी पूरी ताकत बंगाल में झोंक दी। पिछले 15 वर्षों से सत्ता में काबिज ममता बनर्जी की सरकार को कड़ी चुनौती देते हुए भाजपा ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। 293 सीटों में से 207 सीटें जीतकर पार्टी ने प्रचंड बहुमत हासिल किया और सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच गई। यह परिणाम न केवल बंगाल की राजनीति में बदलाव का संकेत है, बल्कि पूर्वी भारत में भाजपा के वर्चस्व को भी दर्शाता है।


बहरहाल, भाजपा का यह विस्तार कोई आकस्मिक घटना नहीं बल्कि एक सतत प्रक्रिया है। राम मंदिर आंदोलन से शुरू हुआ भाजपा का वैचारिक अभियान अब राजनीतिक रूप से ‘अश्वमेध यज्ञ’ की तरह आगे बढ़ रहा है। बिहार में लंबे समय तक सहयोगी दल की भूमिका निभाने के बाद अब भाजपा मुख्य भूमिका में आ गई है।


इसका उदाहरण बिहार में पहले मंत्रिमंडल गठन सादगीपूर्ण रखा गया था, क्योंकि उस समय अन्य राज्यों में चुनाव चल रहे थे। साथ ही पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर भी मतभेद थे। लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और गांधी मैदान में होने वाला भव्य मंत्रिमंडल विस्तार समारोह शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बनेगा। इस कार्यक्रम में कई राज्यों के मुख्यमंत्री और भाजपा के शीर्ष नेता शामिल हो सकते हैं, जिससे यह राष्ट्रीय स्तर का आयोजन बन जाएगा।


राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी यह विस्तार महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चर्चा है कि कई नए चेहरों को प्रमुख भूमिका दी जा सकती है, जिससे सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश होगी। इसके अलावा सहयोगी दलों को भी प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है, ताकि गठबंधन संतुलन बना रहे।


यह पूरा घटनाक्रम संकेत देता है कि भाजपा अब केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह राजनीतिक संदेशों के जरिए अपनी वैचारिक और संगठनात्मक पकड़ मजबूत कर रही है। हिंदी पट्टी में झारखंड को छोड़कर लगभग सभी राज्यों में भाजपा की स्थिति मजबूत हो चुकी है। ऐसे में आने वाले समय में पार्टी का लक्ष्य उन राज्यों पर भी फोकस करना होगा जहां वह अभी सत्ता में नहीं है।


बिहार की राजनीतिक भूमि ऐतिहासिक रूप से परिवर्तन का केंद्र रही है—चाहे स्वतंत्रता आंदोलन हो या जयप्रकाश नारायण का आंदोलन। 2013 में भी पटना के गांधी मैदान से ही नरेंद्र मोदी ने अपने राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की थी। आज एक बार फिर वही जमीन बड़े राजनीतिक संकेत दे रही है।


कुल मिलाकर, अंग-बंग-कलिंग की यह रणनीति केवल ऐतिहासिक संदर्भ नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की राजनीति का रोडमैप बनती नजर आ रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस गति को कैसे बनाए रखती है और देश की राजनीति को किस दिशा में ले जाती है।

संबंधित खबरें