UGC New Rules Controversy: UGC के विरोध के सवाल पर केंद्रीय मंत्री की बोलती बंद, कैमरे के सामने लगाने लगे धार्मिक नारे; वीडियो हो रहा वायरल

UGC New Rules Controversy: UGC के नए नियमों को लेकर सवर्ण समाज के विरोध पर पूछे गए सवाल से केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने जवाब देने से परहेज किया और कैमरे के सामने धार्मिक नारे लगाने लगे, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Tue, 27 Jan 2026 12:22:31 PM IST

UGC New Rules Controversy

- फ़ोटो Google

UGC New Rules Controversy: देश में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। खासतौर पर सवर्ण समाज में इन नियमों को लेकर नाराज़गी खुलकर सामने आ रही है। इसी बीच जब केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से इस आक्रोश पर सवाल किया गया, तो उनका जवाब चर्चा का विषय बन गया।


यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब नित्यानंद राय बिहार के वैशाली जिले के हाजीपुर स्थित कौनहारा घाट पहुंचे थे। यहां गजग्राह की मूर्ति के शिलान्यास और अनावरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम से पहले उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना की। इसी दौरान पत्रकारों ने उनसे UGC के नए नियमों को लेकर सवर्ण समाज के विरोध पर सवाल किया।


सवाल सुनते ही मंत्री नित्यानंद राय सीधे जवाब देने से बचते नजर आए और ‘हर-हर महादेव’, ‘भारत माता की जय’, ‘भगवान विष्णु की जय’ और ‘हरिहरनाथ की जय’ जैसे धार्मिक नारे लगाने लगे। पत्रकारों द्वारा सवाल दोहराए जाने के बावजूद उन्होंने किसी भी राजनीतिक या नीतिगत टिप्पणी से परहेज किया और नारे लगाते रहे। 


यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में कैद हो गया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना के बाद यह बहस और तेज हो गई है कि सरकार UGC के नए नियमों जैसे संवेदनशील मुद्दे पर खुलकर अपनी स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर रही है।


बता दें कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 13 जनवरी को प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन 2026 लागू किया है। इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), महिलाओं और दिव्यांग छात्रों, शिक्षकों व कर्मचारियों के साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त करना बताया गया है।


नए नियमों के तहत हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में 9 सदस्यों वाली एक समानता समिति (इक्विटी कमेटी) गठित करने का प्रावधान है। इस समिति में संस्थान प्रमुख, तीन प्रोफेसर, एक कर्मचारी, दो सामान्य नागरिक, दो विशेष रूप से आमंत्रित छात्र और एक को-ऑर्डिनेटर शामिल होंगे। नियमों के अनुसार, समिति की कम से कम पांच सीटें SC, ST, OBC, दिव्यांगजन और महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।


इसी प्रावधान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नियमों का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि समानता समिति में सामान्य वर्ग यानी जनरल कैटेगरी के लिए कोई अनिवार्य प्रतिनिधित्व तय नहीं किया गया है, जिससे असंतोष और विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है।