ब्रेकिंग
झारखंड में भीषण सड़क हादसा, ऑटो और कंटेनर की आमने-सामने टक्कर में 7 लोगों की मौतशिक्षक के पास नकली नोटों का बड़ा भंडार, औरंगाबाद में लाखों के जाली नोट बरामद; दो गिरफ्तारबांकीपुर जीत के बाद जन सुराज का जोश हाई, फिर से बिहार यात्रा पर निकलेंगे प्रशांत किशोर; MLC और पंचायत चुनाव पर फोकसNSMCH में धूमधाम से मनाया गया 80वां स्वतंत्रता दिवस, सुरक्षा कर्मियों को किया गया सम्मानित; छात्र-छात्राओं ने बांधा समांरेलवे पटरी के पास मिला विवाहिता का शव, पिता ने पति पर लगाया हत्या का आरोप; पति गिरफ्तारझारखंड में भीषण सड़क हादसा, ऑटो और कंटेनर की आमने-सामने टक्कर में 7 लोगों की मौतशिक्षक के पास नकली नोटों का बड़ा भंडार, औरंगाबाद में लाखों के जाली नोट बरामद; दो गिरफ्तारबांकीपुर जीत के बाद जन सुराज का जोश हाई, फिर से बिहार यात्रा पर निकलेंगे प्रशांत किशोर; MLC और पंचायत चुनाव पर फोकसNSMCH में धूमधाम से मनाया गया 80वां स्वतंत्रता दिवस, सुरक्षा कर्मियों को किया गया सम्मानित; छात्र-छात्राओं ने बांधा समांरेलवे पटरी के पास मिला विवाहिता का शव, पिता ने पति पर लगाया हत्या का आरोप; पति गिरफ्तार

स्पीकर ने राजभवन के कामकाज पर उठाए सवाल, कहा- बीजेपी के इशारे पर हो रहा काम

RANCHI: झारखंड विधानसभा के स्पीकर रबींद्र महतो ने सरना कोड और 1932 के खतियान को लेकर राजभवन के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। जेएमएम के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्पीकर रबींद्र मह

स्पीकर ने राजभवन के कामकाज पर उठाए सवाल, कहा- बीजेपी के इशारे पर हो रहा काम
Mukesh Srivastava
2 मिनट

RANCHI: झारखंड विधानसभा के स्पीकर रबींद्र महतो ने सरना कोड और 1932 के खतियान को लेकर राजभवन के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। जेएमएम के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्पीकर रबींद्र महतो ने आरोप लगाया है कि राजभवन बीजेपी के इशारे पर काम कर रहा है।


वहीं स्पीकर रबींद्र महतो ने ट्वीट कर लिखा है कि "विधान सभा मे विशेष सत्र बुलाकर आदिवासियों की पहचान सरना धर्म कोड को विधान सभा से पारित कर राजभवन को भेजा लेकिन राजभवन से बिल को लौटाया गया। 1932 का खतियान को विधान सभा से पारित कर राजभवन को भेजा, जो वो भी लौटा दिया गया। राजभवन भी भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है"।


बता दें कि इसी साल जनवरी महीने में तत्कालीन राज्यपाल रमेश बैस ने 1932 के खतियान पर आधारित स्थानीय नीति से जुड़े राज्य सरकार के विधेयक को फिर से समीक्षा करने के लिए वापस लौटा दिया था। राज्य सरकार ने साल 2020 में राजभवन की सहमति के बगैर केंद्र सरकार के पास सरना आदिवासी धर्म कोड का प्रस्ताव भेज दिया था। कानून के हिसाब से विशेषज्ञों ने इसे सही नहीं ठहराया। जिसके बाद विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर सरना आदिवासी धर्मकोड का प्रस्ताव पास कराया था।

टैग्स