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चांदी के आयात पर नई पाबंदियां लागू, सरकार ने फ्री लिस्ट से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ कैटेगरी में डाला; विदेशी मुद्रा भंडार बचाने पर फोकस

Silver import restrictions: केंद्र सरकार ने चांदी के आयात पर नई पाबंदियां लागू करते हुए कई कैटेगरी को ‘रिस्ट्रिक्टेड’ सूची में डाल दिया है। सरकार का उद्देश्य बढ़ते आयात, व्यापार घाटे और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव को नियंत्रित करना है।

Silver import restrictions
प्रतिकात्मक तस्वीर
© Google
Mukesh Srivastava
3 मिनट

Silver import restrictions: केंद्र सरकार ने चांदी के आयात को लेकर नई पाबंदियां लागू कर दी हैं। सरकार ने चांदी की कई श्रेणियों को फ्री लिस्ट से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ कैटेगरी में डाल दिया है। इसका मतलब है कि अब इन श्रेणियों की चांदी का आयात पहले की तरह आसान नहीं रहेगा और इसके लिए अतिरिक्त मंजूरी की आवश्यकता पड़ सकती है।


सरकार का यह कदम देश में कीमती धातुओं के बढ़ते आयात को नियंत्रित करने और व्यापार घाटा (ट्रेड डेफिसिट) कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। पिछले कुछ समय से सोना और चांदी के आयात में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही थी, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ने की चिंता भी जताई जा रही थी।


सरकार को आशंका है कि सोने पर आयात शुल्क बढ़ने के बाद निवेशक और ज्वेलरी कारोबार से जुड़े लोग चांदी की ओर ज्यादा रुख कर सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए अब चांदी के आयात नियमों को भी सख्त किया गया है।


हाल ही में सरकार ने सोना और चांदी दोनों पर इम्पोर्ट ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी थी। इसके बावजूद माना जा रहा था कि सोने की तुलना में सस्ती होने के कारण चांदी की मांग और आयात बढ़ सकता है। सरकार फिलहाल विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने और रुपये पर बढ़ते दबाव को कम करने पर ध्यान दे रही है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बढ़ते आयात बिल को देखते हुए सरकार सतर्क रुख अपनाए हुए है।


विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कीमती धातुओं का आयात लगातार बढ़ता रहा, तो इससे चालू खाते का घाटा और व्यापार घाटा दोनों बढ़ सकते हैं। यही कारण है कि सरकार अब आयात नियंत्रण के जरिए स्थिति को संतुलित करने की कोशिश कर रही है।


सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल महीने में सोना और चांदी का आयात लगभग 30 वर्षों के निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसके पीछे ऊंची इम्पोर्ट ड्यूटी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों को प्रमुख कारण माना जा रहा है। अब नई पाबंदियों के लागू होने के बाद आने वाले महीनों में चांदी के आयात में और गिरावट देखने को मिल सकती है।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता