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Rama Nishad: कौन हैं रमा निषाद? जिन्हें नीतीश सरकार में मिली बड़ी जिम्मेदारी

Rama Nishad: बिहार में राजनीति के इतिहास में औराई विधानसभा सीट से रमा निषाद ने एक यादगार जीत दर्ज की है। BJP की उम्मीदवार रमा निषाद ने अपने प्रतिद्वंदी विकासशील इंसान पार्टी के भोगेन्द्र सहनी को लगभग 57 हजार मतों के विशाल अंतर से पराजित किया।

Rama Nishad
रमा निषाद
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PRIYA DWIVEDI
4 मिनट

Rama Nishad: बिहार में राजनीति के इतिहास में औराई विधानसभा सीट से रमा निषाद ने एक यादगार जीत दर्ज की है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उम्मीदवार रमा निषाद ने अपने प्रतिद्वंदी विकासशील इंसान पार्टी के भोगेन्द्र सहनी को लगभग 57 हजार मतों के विशाल अंतर से पराजित किया। इस जीत के साथ ही रमा निषाद बिहार की सबसे अधिक अंतर से जीतने वाली विधायकों में शामिल हो गई हैं। इस बड़ी जीत ने उन्हें नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनने वाली नई बिहार सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की चर्चाओं में ला दिया है।


रमा निषाद मुजफ्फरपुर के पूर्व सांसद अजय निषाद की पत्नी और पूर्व केंद्रीय मंत्री कैप्टन जय नारायण निषाद की बहू हैं। राजनीति में उनका नाम अपने परिवार की राजनीतिक विरासत और खुद के संघर्ष के कारण चर्चा में रहा है। नीतीश कुमार ने मुजफ्फरपुर के मीनापुर में एक चुनावी सभा में मंच पर रमा निषाद को माला पहनाकर सम्मानित किया, जिसके बाद उनकी लोकप्रियता और चर्चा और बढ़ गई।


रमा निषाद को मुजफ्फरपुर की औराई विधानसभा सीट पर निवर्तमान विधायक और पूर्व मंत्री राम सूरत राय का टिकट काटकर मौका दिया गया था। यह कदम इलाके में कुछ विरोध और असहमति का कारण बना, लेकिन बड़े नेताओं के हस्तक्षेप और पार्टी के निर्णय के बाद मामला शांत हो गया। उनके पति अजय निषाद के प्रति स्थानीय मतदाताओं में गहरा आक्रोश देखा गया, क्योंकि 2024 लोकसभा चुनाव में उन्हें पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा था। अजय निषाद ने कांग्रेस के उम्मीदवार राजभूषण चौधरी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरकर अपनी बात रखी, लेकिन वे चुनाव हार गए। हालांकि, विधानसभा चुनाव के समय वे भाजपा में वापस लौटे और अपनी पत्नी रमा निषाद का टिकट सुनिश्चित करवाया।


रमा निषाद का राजनीति से पुराना नाता रहा है। वे मुजफ्फरपुर से पांच बार लोकसभा सांसद रह चुकी हैं और विभिन्न दलों में अपनी राजनीतिक यात्रा जारी रखी। उन्होंने लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के साथ काम करने के बाद बीजेपी का दामन थामा और अपने बेटे अजय निषाद को अपने उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित किया। विधायक बनने से पहले रमा निषाद हाजीपुर नगर परिषद की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। उनकी पहचान सिर्फ एक सफल राजनीतिज्ञ के रूप में नहीं, बल्कि आदर्श पत्नी और आदर्श बहू के रूप में भी रही है।


राजनीतिक उपलब्धियों और परिवारिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ समाजिक पहचान भी रमा निषाद की मंत्री बनने की संभावनाओं को मजबूत बनाती है। वे मल्लाह समाज से आती हैं, जो उन्हें नीतीश कुमार की नई सरकार में सामाजिक समावेशिता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बनाता है। पहली बार विधानसभा चुनाव में इतनी बड़ी अंतर से जीत दर्ज कर उन्होंने अपने राजनीतिक करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।


रमा निषाद की इस जीत और उनके परिवार की राजनीतिक सक्रियता ने यह संदेश दिया है कि बिहार की राजनीति में अनुभव, लोकप्रियता और समाजिक पहचान का मेल ही सफलता की कुंजी है। आने वाले समय में उनके मंत्रिमंडल में शामिल होने की संभावना राज्य और पार्टी दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


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