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BJP के बाद RLJD ने भी इफ्तार से किया किनारा, कुशवाहा बोले- हिंसा के बीच दावत-ए-इफ्तार जले पर नमक के समान

PATNA: बिहार की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से इफ्तार वाली सियासत शुरू है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इफ्तार पार्टी के बाद जेडीयू की तरफ से दावत-ए-इफ्तार का आयोजन किया गया। वहीं रव

BJP के बाद RLJD ने भी इफ्तार से किया किनारा, कुशवाहा बोले- हिंसा के बीच दावत-ए-इफ्तार जले पर नमक के समान
Mukesh Srivastava
3 मिनट

PATNA: बिहार की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से इफ्तार वाली सियासत शुरू है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इफ्तार पार्टी के बाद जेडीयू की तरफ से दावत-ए-इफ्तार का आयोजन किया गया। वहीं रविवार को आरजेडी की तरफ से भी इफ्तार पार्टी का आयोजन किया जा रहा है हालांकि रामनवमी के दौरान हुई हिंसा के बीच इफ्तार पार्टी के आयोजनों पर बीजेपी ने कड़ी आपत्ति जताई है। इसी बीच अब बीजेपी को कुशवाहा का साथ मिल गया है। उपेंद्र कुशवाहा ने कहा है कि उनकी पार्टी राष्ट्रीय लोक जनता दल की तरफ से इफ्तार पार्टी का आयोजन नहीं किया जाएगा। कुशवाहा ने साफ शब्दों में कह दिया है कि हिंसा के बीच दावत-ए-इफ्तार का आयोजन जले पर नमक के समान है।


दरअसल, बिहार में सियासी इफ्तार का सिलसिला काफी पुराना रहा है। मुस्लिम वोट बैंक को साधने के लिए सभी सियासी दल हर वर्ष रमजान के मौके पर दावत-ए-इफ्तार का आयोजन करते रहे हैं। इस बार भी विभिन्न दलों की तरफ से इफ्तार पार्टी का आयोजन किया जा रहा है।हालांकि, रामनवमी के दौरान बिहार में हुई हिंसा के बीच इफ्तार पार्टी के आयोजनों पर बीजेपी ने आपत्ति जताई और इस तरह के आयोजनों से दूरी बना ली है। अब नीतीश से अलग होकर नई पार्टी बनाने वाले उपेंद्र कुशवाहा भी बीजेपी के साथ खड़े हो गए हैं। उपेंद्र कुशवाहा ने भी कह दिया है कि वे हिंसा के बीच इफ्तार पार्टी का समर्थन नहीं करते हैं।


उपेंद्र कुशवाहा ने ट्वीट कर लिखा कि, “रमज़ान का पवित्र महीना चल रहा है। इफ्तार पार्टी का दौर शुरू हो गया है। मुझे भी कुछ प्रमुख जगहों से निमंत्रण मिला है/मिल रहा है। पार्टी के कई साथियों ने रालोजद की ओर से इफ्तार पार्टी के आयोजन की सलाह मुझे भी दी है । मेरी समझ से सासाराम, बिहार शरीफ आदि शहरों के वर्तमान हालात के मद्देनजर इफ्तार के नाम पर समारोह नहीं, बल्कि रोजेदारों की सहुलियत के प्रति गंभीर होना चाहिए क्योंकि फिलहाल जश्न नहीं जख्म पर मरहम की जरूरत है। शायद समारोह जले पर नमक छिड़कने जैसा न हो जाए।