Mukesh Sahani News: विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के संस्थापक एवं बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी की गोरखपुर के बिलंदपुर में प्रस्तावित प्रेस वार्ता पुलिस ने आयोजित नहीं होने दी. कार्यक्रम स्थल पहुंचने से पहले ही पुलिस ने उन्हें सड़क पर रोक दिया, जिसके बाद पुलिस अधिकारियों और वीआईपी कार्यकर्ताओं के बीच काफी देर तक नोकझोंक होती रही. इस दौरान मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक माहौल भी गरमा गया.
घटना के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मुकेश सहनी ने उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन पर लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि प्रदेश में लोकतंत्र नहीं बल्कि “गुंडा राज” और “अघोषित इमरजेंसी” का माहौल है. सहनी ने कहा कि अगर उन्होंने कोई अपराध किया है तो उन्हें गिरफ्तार किया जाए, लेकिन बिना किसी कानूनी आधार के सड़क पर रोकना संविधान और नागरिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है.
मुकेश सहनी ने कहा कि किसी भी आम नागरिक को बीच सड़क पर रोकने का अधिकार किसी के पास नहीं है. चाहे वह प्रधानमंत्री हों, मुख्यमंत्री हों या कोई बड़ा अधिकारी, संविधान से ऊपर कोई नहीं हो सकता. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें ऐसे घेरा गया जैसे वे कोई आतंकवादी हों, जबकि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने आए थे. उन्होंने कहा कि पुलिस यदि बातचीत करना चाहती थी तो उन्हें एसपी कार्यालय बुलाया जा सकता था, लेकिन सड़क पर रोककर आम लोगों को भी परेशान किया गया, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ.
उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन जनता के सेवक हैं, मालिक नहीं. अधिकारियों के कंधों पर लगे सितारे संविधान की देन हैं और उनका वेतन जनता के टैक्स के पैसे से चलता है. यदि कोई अधिकारी खुद को जनता का मालिक समझने लगे तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है.
मुकेश सहनी ने आरोप लगाया कि वीआईपी की ओर से कार्यक्रम के लिए विधिवत अनुमति मांगी गई थी, लेकिन प्रशासन ने बाद में पत्र जारी कर कार्यक्रम रद्द कर दिया. उन्होंने कहा कि उनका गोरखपुर में रात्रि विश्राम का कार्यक्रम भी था और अगले दिन उन्हें मुंबई रवाना होना था, लेकिन प्रशासन उन्हें जिले में रुकने तक नहीं देना चाहता. उन्होंने सवाल उठाया कि जब उन्होंने कोई गैरकानूनी काम नहीं किया तो आखिर किस आधार पर उन्हें रोका जा रहा है.
सहनी ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में उनकी पार्टी के कार्यक्रमों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है. सभाओं की अनुमति रद्द की जा रही है, होटल संचालकों पर दबाव बनाया जा रहा है और विपक्षी नेताओं को प्रशासनिक ताकत के जरिए रोका जा रहा है. उन्होंने कहा कि इससे पहले लखनऊ में भी उन्हें कई दिनों तक हाउस अरेस्ट रखा गया था. उनके मुताबिक यह सब निषाद समाज की आवाज दबाने और आरक्षण की मांग को कमजोर करने की कोशिश है.
आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार को छह महीने का अल्टीमेटम दिया गया था, जिसमें से तीन महीने पूरे हो चुके हैं और तीन महीने बाकी हैं. यदि तय समय सीमा के भीतर निषाद समाज को आरक्षण नहीं मिला तो पार्टी पूरे उत्तर प्रदेश में व्यापक जनआंदोलन शुरू करेगी और विधानसभा चुनाव में इसे बड़ा मुद्दा बनाएगी. उन्होंने केंद्रीय मंत्री संजय निषाद के आरक्षण संबंधी बयान का स्वागत करते हुए कहा कि यदि वे वास्तव में समाज के हितैषी हैं तो उन्हें केंद्र सरकार से आरक्षण दिलाने की दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए.





