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झारखंड ने नहीं की तरक्की, खूंटी में बोलीं द्रौपदी मुर्मू ... मैं ओडिशा की हूं,लेकिन शरीर में बहता है यहां का खून

RANCHI : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के झारखंड दौरे का आज दूसरा दिन है। आज के दिन उन्होंने खूंटी में महिला सम्मेलन में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को संबोधित किया है। इस दौरान उन्हो

झारखंड ने नहीं की तरक्की, खूंटी में बोलीं द्रौपदी मुर्मू  ... मैं ओडिशा की हूं,लेकिन शरीर में बहता है यहां का खून
Tejpratap
Tejpratap
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RANCHI : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के झारखंड दौरे का आज दूसरा दिन है। आज के दिन उन्होंने खूंटी में महिला सम्मेलन में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को संबोधित किया है। इस दौरान उन्होंने कहा कि,वह ओडिशा में पैदा हुईं, लेकिन उनके शरीर में खून झारखंड का बह रहा है। जोबा मांझी जिस परिवार की बहू हैं, उनकी दादी का उस परिवार से संबंध है।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वयं सहायता समूहों को मिलने वाली सुविधाओं की बात करते हुए कहा कि महिला समूह के उत्पादों को मैंने देखा।उनके चेहरे की मुस्कान को भी मैंने देखी। मैंने उनसे यह पूछा कि - आपको सालाना कितना मिलता है, आप खुश हैं? उन्होंने कहा - हां। मैं उनके चेहरे को देखकर अपना बचपन याद करने लगी. महिलाओं को देखकर थोड़ी ईर्ष्या में थी। शायद मेरे पास भी वही ज्ञान होता बचपन में। 


राष्ट्रपति ने अपने बचपन की यादों को साझा करते हुए कहा कि, गांव से 5-6 किलोमीटर दूर हमारे खेत थे। खेतों की आड़ियों (मेड़) पर महुआ के 22 पेड़ थे। हम रात को दो बजे उठकर महुआ चुनने जाते थे। मेरी दादी ले जाती थी। झारखंड राज्य को अलग हुए 22 साल हो गए। अधिकांश सीएम आदिवासी हुए। 28 से अधिक एमएलए आदिवासी हैं। फिर भी झारखंड को जितनी तरक्की करनी चाहिए थी, उतना नहीं हो सका। इसके बारे सोचने की जरूरत है।


इसके आगे उन्होंने कहा कि, जनजातीय समाज में दहेज प्रथा नहीं है. हम कितने भाग्यशाली हैं कि हमने इस समाज में जन्म लिया। हम बिना दहेज के बहू लाते हैं, बिना दहेज के बेटी देते हैं। अन्य समाज को भी इसका अनुकरण करना चाहते हैं, लेकिन कर नहीं पाते। राष्ट्रपति ने दहेज को एक राक्षस करार दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि झारखंड में महिलाओं के नेतृत्व में विकास की नयी गाथाएं लिखी जायेंगी।