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Mukul Roy Death: पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का निधन, 71 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

र्व केंद्रीय रेल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय का 71 वर्ष की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार थे और कोलकाता के अस्पताल में भर्ती थे। उनके निधन से पश्चिम बंगाल की राजनीति में शोक की लहर है।

Mukul Roy Death
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Mukul Roy Death: पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय का सोमवार तड़के दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 71 वर्ष के थे। उन्हें कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां रात करीब 1:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि कार्डियक अरेस्ट के कारण उनका देहांत हुआ।


14 मई 1954 को उत्तर 24 परगना के कांचरापाड़ा में जन्मे मुकुल रॉय ने राजनीति में आने से पहले ट्रेड यूनियन गतिविधियों में हिस्सा लिया। उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और बाद पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एमए किया। वह 1998 में स्थापित ऑल इंडिया त्रिणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में रहे और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी माने जाते थे। पार्टी में महासचिव रहते हुए उन्होंने संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।


मुकुल रॉय 2006 में राज्यसभा के लिए चुने गए और 2009 से 2012 तक सदन में पार्टी के नेता रहे। यूपीए-II सरकार में उन्होंने पहले शिपिंग मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। मार्च 2012 में उन्होंने रेल मंत्रालय की कमान संभाली और पूर्व रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी की जगह ली। 2011 में पश्चिम बंगाल में 34 वर्षों के वाम शासन का अंत होने के बाद पार्टी को मजबूत करने में उनकी रणनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण रही।


नवंबर 2017 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा। 2019 के लोकसभा चुनाव में बंगाल में भाजपा के बेहतर प्रदर्शन में उनकी अहम भूमिका मानी गई। 2021 के विधानसभा चुनाव में वह कृष्णानगर उत्तर से भाजपा विधायक चुने गए। हालांकि जून 2021 में वह फिर तृणमूल कांग्रेस में लौट आए, लेकिन पहले जैसी सक्रियता नहीं दिखी। 


वह डिमेंशिया समेत कई बीमारियों से जूझ रहे थे। 13 नवंबर 2025 को कोलकाटा हाई कोर्ट ने दलबदल कानून के तहत उन्हें विधायक पद से अयोग्य घोषित कर दिया था। मुकुल रॉय के निधन से पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है।

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता