Bihar Politics: ‘SIT मौन है, मुख्यमंत्री मौन हैं, गृहमंत्री दे रहे घिसा-पिटा जवाब’, NEET छात्रा की संदिग्ध मौत मामले पर रोहिणी ने उठाए सवाल

Bihar Politics: पटना के शंभी गर्ल्स हॉस्टल की छात्रा की संदिग्ध मौत मामले में लालू की बेटी रोहिणी आचार्य ने SIT और सरकार की मौन नीति पर सवाल उठाए, कहा पुलिस भटकाने की कोशिश कर रही है।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Tue, 20 Jan 2026 02:19:18 PM IST

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Bihar Politics: पटना के शंभी गर्ल्स हॉस्टल की छात्रा की संदिग्ध मौत मामले में अबतक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से सरकार और पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है। घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस की एसआईटी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है और अंधेरे मे तीर चला रही है। इस घटना को लेकर सियासत भी खूब हो रही है।


लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य इस मामले को लेकर लगातार सरकार और पटना पुलिस पर सवाल उठा रही है। रोहिणी ने एक बार फिर से सरकार और पटना पुलिस पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रोहिणी आचार्य ने एक्स पर पोस्ट लिखा है और कहा है कि पूरे मामले पर सरकार और एसआईटी ने चुप्पी साध रखी है वहीं राज्य के गृहमंत्री घिसा पीटा जवाब देकर सिर्फ औपचारिकता पूरी कर रहे हैं।


रोहिणी आचार्य ने एक्स पर लिखा, “दिशाहीन जाँच .. भटकाने की कोशिश !! बिहार के लोगों में ये आम धारणा कायम हो रही है कि "शम्भू गर्ल्स हॉस्टल कांड में अगर किसी ने पुलिसिया जाँच से कोई उम्मीद लगा रखी है , तो वो मुगालते में जी रहा है ".. ऐसी धारणा कायम होने की वाजिब वजहें भी हैं " घटना घटित हुए लगभग एक पखवारे का समय होने जा रहा है , उपलब्ध साक्ष्यों व् उजागर पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट से लगभग सब कुछ स्पष्ट है, फिर भी पुलिस के द्वारा पुलिसिया जाँच की आड़ में रोज एक नयी भटकाने, भ्रम पैदा करने वाली थ्योरी सामने रखी जा रही है”।


रोहिणी ने आगे लिखा, “हॉस्टल सचालकों , सहज सर्जरी नर्सिंग होम, प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल, प्रभात हॉस्पिटल के डॉक्टर सतीश , चित्रगुप्त नगर थाने की महिला पुलिस अधिकारी , पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक पर किसी भी प्रकार कोई पुख्ता कार्रवाई अभी तक नहीं हुई है , मुख्य आरोपियों की अब तक नहीं हुई गिरफ़्तारी के सवाल पर भी सरकार के द्वारा गठित एसआईटी मौन है , बिहार के माननीय मुख्यमंत्री मौन हैं, गृह - मंत्री घिसा - पिटा जवाब दे कर औपचारिकता पूरी करते दिख रहे हैं"।


अंत में रोहिणी लिखती हैं, “ऐसा प्रतीत होता है कि बिहार सरकार व् पुलिस जाँच की दिशा को लंबा खींच व् भटका कर मामले को ठंढा करने की कोशिश के साथ मामले की लीपापोती करने वाले आरोपियों एवं अभियुक्तों को किसी बड़े दबाब की वजह से बचाना चाह रही है.. !!”.