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Bihar politics: बिहार में नहीं चलेगा पुराना फॉर्मूला, अब ऐसे होगा मंत्रिपदों का बंटवारा; जानिए

Bihar politics: बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद सरकार गठन की कवायद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। चुनाव से पहले बीजेपी और जेडीयू के बीच बराबर सीटों पर लड़ने का फार्मूला तय हुआ था।

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बिहार की राजनीतिक में हलचल
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PRIYA DWIVEDI
4 मिनट

Bihar politics: बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद सरकार गठन की कवायद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के बीच बराबर सीटों पर लड़ने का फार्मूला तय हुआ था, जिसके तहत दोनों दलों ने 101-101 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। इसी आधार पर नई सरकार में दोनों दलों को बराबर मंत्रिपद मिलने की संभावना जताई जा रही है। एनडीए के छोटे सहयोगी दलों को भी उनकी ताकत और चुनावी प्रदर्शन के अनुसार प्रतिनिधित्व देने पर मंथन चल रहा है।


सूत्रों के अनुसार, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) को दो मंत्रिपद, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) को एक मंत्रिपद और उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय लोक मोर्चा को भी एक मंत्री पद दिया जा सकता है। हालांकि सीटों और मंत्रालयों के अंतिम स्वरूप पर अभी औपचारिक सहमति नहीं बनी है। एनडीए घटक दलों और शीर्ष नेतृत्व के बीच लगातार बातचीत जारी है, जिसमें कई अनुभवी मंत्रियों के पोर्टफोलियो में बदलाव की भी चर्चा है।


राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच सोमवार को जेडीयू विधायक दल की बैठक निर्धारित है। इस बैठक के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यपाल से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं, ताकि नई सरकार के गठन का रास्ता औपचारिक रूप से साफ हो सके। वहीं, मंगलवार को बीजेपी विधायक दल की बैठक आयोजित होने की संभावना है, जिसमें एनडीए की ओर से नए नेतृत्व और सरकार गठन को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।


243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में इस बार बीजेपी ने 89 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल बनकर उभर है, जबकि जेडीयू ने 85 सीटों पर जीत हासिल की है। एलजेपी (आरवी) के खाते में 19 सीटें, HAM (S) को 5 सीटें और आरएलएम को 4 सीटें मिली हैं। तुलना के लिए 2020 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 74 और जेडीयू को 43 सीटें मिली थीं, जबकि सरकार में बीजेपी के 22 और जेडीयू के 12 मंत्री शामिल थे। मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर को समाप्त हो रहा है, इसलिए शपथग्रहण बुधवार या गुरुवार को होने की संभावना बहुत मजबूत है।


बीजेपी सूत्रों का कहना है कि चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और महासचिव बी. एल. संतोष की बैठक हुई थी, जिसमें सरकार गठन के रोडमैप पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।


बिहार की नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह इस बार पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित किया जाएगा। 2015 में महागठबंधन सरकार बनने के समय भी नीतीश कुमार ने यहीं शपथ ली थी। इस बार भी एनडीए की जीत का जश्न जनता के बीच मनाने के लिए गांधी मैदान को ही चुना गया है। 17 से 20 नवंबर तक मैदान को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है, ताकि प्रशासनिक टीमें बिना किसी बाधा के तैयारियाँ कर सकें।


सूत्रों के अनुसार, शपथग्रहण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, कई राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और एनडीए के शीर्ष नेता शामिल होंगे। हजारों लोगों की उपस्थिति को ध्यान में रखते हुए मैदान में विशाल मंच, सुरक्षा व्यवस्था, LED स्क्रीन और सार्वजनिक बैठने की विशेष व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन का दावा है कि इस बार का शपथ समारोह बिहार के राजनीतिक इतिहास के सबसे बड़े आयोजनों में से एक होगा।

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