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Bihar News: बिहार चुनाव से पहले मतदाता सूची अपडेट, 13 लाख नए मतदाता पहली बार डालेंगे वोट; इस दिन होगी लिस्ट जारी

Bihar News: बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य की अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित की जाएगी। यह सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया के बाद पहली बार सामने आएगी।

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PRIYA DWIVEDI
3 मिनट

Bihar News: बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य की अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित की जाएगी। यह सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया के बाद पहली बार सामने आएगी। चुनाव आयोग ने 24 जून को इस प्रक्रिया से संबंधित आदेश जारी किया था, जिसके तहत 25 सितंबर तक सभी दावे और आपत्तियां निपटाए जाने थे। सूत्रों के अनुसार, मतदाता सूची में इस बार 7.3 करोड़ से अधिक मतदाता शामिल होंगे, जो ड्राफ्ट सूची (7.24 करोड़) की तुलना में अधिक है, लेकिन जनवरी 2025 की संभावित मतदाता संख्या (7.8 करोड़) से अभी भी कम है।


एक रिपोर्ट के मुताबिक, अंतिम मतदाता सूची में करीब 14 लाख नए नाम जोड़े जा सकते हैं। इनमें से लगभग 10 लाख मतदाता पहली बार वोट डालने वाले युवा हैं, जिन्होंने हाल ही में 18 वर्ष की आयु पूरी की है। इसके अलावा, 4 से 5 लाख मतदाता 25 वर्ष से अधिक उम्र के हैं, जिन्होंने पहली बार मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए पंजीकरण कराया है। इतनी बड़ी संख्या में 25 वर्ष से अधिक आयु के नए मतदाताओं का जुड़ना असामान्य माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इनमें से कई वे लोग हो सकते हैं, जिनके नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं थे या पिछले पुनरीक्षण के दौरान किसी कारण से छूट गए थे।


चुनाव आयोग ने बताया है कि 1 सितंबर तक कुल 36,475 नाम जोड़ने और 2.17 लाख नाम हटाने के दावे दर्ज किए गए थे। इनमें से 34,000 से अधिक नामों को अंतिम सूची में बहाल किए जाने की संभावना जताई गई है। आयोग ने लचीला रुख अपनाते हुए कुछ और दिनों तक इन दावों और आपत्तियों पर विचार जारी रखने का निर्णय लिया है। अब तक 90% से अधिक मामलों का निपटारा किया जा चुका है।


ड्राफ्ट मतदाता सूची में कुल 7.24 करोड़ मतदाता दर्ज थे। इस सूची से लगभग 65 लाख नाम हटा दिए गए थे। इनमें से 22 लाख मतदाता मृत घोषित किए गए थे, जबकि शेष 45 लाख नाम विभिन्न प्रशासनिक कारणों से हटाए गए। इन कारणों में नामांकन फॉर्म जमा न करना, संबंधित पते पर अनुपस्थित रहना या स्थायी रूप से अन्यत्र स्थानांतरित हो जाना शामिल है।


इन बड़े पैमाने पर नामों की कटौती को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि वैध मतदाताओं के नाम बिना उचित प्रक्रिया के हटा दिए गए। फिलहाल यह मामला अदालत में लंबित है और अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशित होने के बाद ही कटे हुए नामों की सटीक संख्या और स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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