1st Bihar Published by: First Bihar Updated Wed, 19 Nov 2025 11:03:11 AM IST
अमित कात्याल - फ़ोटो GOOGLE
Amit Katyal: बिहार राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा सनसनीखेज मामला सामने आया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी (Enforcement Directorate) ने अमित कात्याल को गिरफ्तार किया है, जो पूर्व मुख्यमंत्री और रालोपा प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बेहद करीबी माने जाते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, उन्हें तेजस्वी यादव से भी खास संबंध रखने वाला बताया जा रहा है। ईडी की गिरफ्तारी का आधार लगभग 300 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जीवाड़े से जुड़ा मामला है।
अमित कात्याल का नाम लंबे समय से रियल एस्टेट और व्यावसायिक लेनदेन में विवादों के कारण सुर्खियों में रहा है। वह M/s Angle Infrastructure Pvt. Ltd. के प्रमोटर और डायरेक्टर रहे हैं, और रियल एस्टेट फ्रॉड के कई मामलों में उनके नाम का उल्लेख हुआ है। इस बार दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज मामले को ईडी ने टेकओवर किया और उसी के आधार पर अमित कात्याल की गिरफ्तारी की गई।
जांच के दौरान यह पता चला कि कृष फ़्लोरेंस एस्टेट, सेक्टर-70, गुरुग्राम परियोजना में फ्लैट न देने के गंभीर आरोप अमित कात्याल पर थे। आरोप है कि उन्होंने सरकारी कर्मचारियों के लिए बनाई गई इस परियोजना में फर्जी बुकिंग्स की थीं। इसके अलावा, उन्होंने अन्य डेवलपर्स के साथ मिलकर लाइसेंस प्राप्त किया और DTCP हरियाणा से लाइसेंस मिलने से पहले ही खरीदारों से पैसा इकट्ठा करना शुरू कर दिया। इससे भारी वित्तीय नुकसान हुआ और मामला गंभीर रूप से तूल पकड़ गया।
सूत्रों के अनुसार, अमित कात्याल और लालू परिवार के बीच न केवल राजनीतिक बल्कि व्यक्तिगत संबंध भी गहरे हैं। उनके दिल्ली स्थित आवास का संबंध उस कोठी से बताया जा रहा है जहां तेजस्वी यादव रुकते हैं। यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में अमित कात्याल को लालू यादव फैमिली का “अत्यंत भरोसेमंद करीबी” कहा जाता है। उनका राजनीतिक और व्यवसायिक नेटवर्क बिहार और दिल्ली में काफी प्रभावशाली माना जाता है।
अमित कात्याल के खिलाफ पहले भी कई मामले दर्ज हो चुके हैं। विशेष रूप से रियल एस्टेट और फ्रॉड से जुड़े उनके मामलों की लंबी सूची है। इस गिरफ्तारी के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि ईडी और अन्य केंद्रीय एजेंसियां अब बड़ी पैमाने पर वित्तीय और रियल एस्टेट फ्रॉड की जांच कर रही हैं। उनके खिलाफ मामला करीब 300 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े से जुड़ा है, जो कि निवेशकों और खरीदारों के लिए गंभीर वित्तीय नुकसान का कारण बना।
यह गिरफ्तारी बिहार चुनाव के बाद लालू और तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ा सकती है। अमित कात्याल के लालू परिवार और तेजस्वी यादव से करीबी संबंधों के कारण इस मामले की राजनीतिक संवेदनशीलता भी काफी अधिक है। हालांकि, ईडी का स्पष्ट कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ वित्तीय और रियल एस्टेट फ्रॉड के आधार पर की गई है, और इसमें राजनीतिक पक्ष नहीं जोड़ा जा रहा है।
अमित कात्याल के मामलों में यह नया मोड़ रियल एस्टेट निवेशकों के लिए भी चेतावनी है। इसमें कानूनी प्रक्रियाओं का पालन न करना, फर्जी बुकिंग और पैसा जुटाने की अनियमितताएं मुख्य मुद्दे हैं। इसके अलावा, उनके द्वारा की गई कार्रवाइयों का असर कई खरीदारों और सरकारी योजनाओं पर भी पड़ा।
इस गिरफ्तारी से यह भी संकेत मिलता है कि केंद्रीय जांच एजेंसियां बड़े पैमाने पर वित्तीय और रियल एस्टेट फ्रॉड मामलों में तेजी से कार्रवाई कर रही हैं। अमित कात्याल के खिलाफ आगे की जांच में उनकी संपत्ति, बैंक लेनदेन और अन्य वित्तीय गतिविधियों की विस्तृत जांच की जाएगी। इस मामले का परिणाम न केवल उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तक सीमित होगा, बल्कि इसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव भी देखे जा सकते हैं।
अमित कात्याल लालू और तेजस्वी यादव के बेहद करीबी हैं और उनका रियल एस्टेट और वित्तीय लेनदेन विवादों से भरा रहा है। ईडी की गिरफ्तारी ने उनके व्यवसाय और राजनीतिक नेटवर्क पर गंभीर प्रभाव डाला है। अब यह देखना बाकी है कि आगे की जांच में क्या खुलासे होंगे और यह मामले बिहार राजनीति और निवेशकों के लिए किस तरह से परिणाम लाता है।