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पैरोल खत्म.. जेल में वापसी से पहले भावुक हुए आनंद मोहन, परिवार को सरकार से राहत की उम्मीद

1st Bihar Published by: Updated Nov 20, 2022, 9:17:17 PM

पैरोल खत्म.. जेल में वापसी से पहले भावुक हुए आनंद मोहन, परिवार को सरकार से राहत की उम्मीद

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PATNA : 15 दिनों का पैरोल खत्म होने के बाद पूर्व सांसद आनंद मोहन आज वापस जेल को लौट गए। इस दौरान पारिवारिक समारोह में उनकी मौजूदगी और राजनेताओं से मुलाकात चर्चा में बनी रही। आनंद मोहन की मुलाकात सालों बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से हुई, डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव से भी उनकी मुलाकात हुई और उन पुराने चेहरों से भी जिनसे कभी आनंद मोहन की अदावत चलती थी। जेल जाने से पहले पूर्व सांसद आनंद मोहन आज बेहद भावुक नजर आए। इस दौरान उन्होंने अपने करीबी लोगों के बीच यह भी कहा कि मुझे न्यायालय पर हमेशा से पूरा भरोसा रहा। बच्चा–बच्चा जानता है कि मैं जिस गुनाह की सजा काट रहा हूं वह मैंने नहीं किया लेकिन कोर्ट से मुझे न्याय की उम्मीद है।


आनंद मोहन के समर्थक लंबे अरसे से आरोप लगाते रहे हैं कि सरकार ने जानबूझकर आनंद मोहन को जेल से बाहर नहीं आने दिया। उम्र कैद की सजा पूरी करने के बावजूद आनंद मोहन अगर जेल में हैं तो इसके पीछे कहीं न कहीं वजह राजनीतिक है हालांकि इस बार आनंद मोहन की केमिस्ट्री जिस तरह सरकार में बैठे लोगों के साथ देखने को मिली है उसके बाद पूर्व सांसद के समर्थकों को भी उम्मीद जगी है। समर्थक मानते हैं कि आनंद मोहन को जेल से रिहा करने का रास्ता साफ हो सकता है, सरकार इस दिशा में पहल कर सकती है।


हालांकि खुद आनंद मोहन अब पुराने दौर की बात नहीं करना चाहते। लालू यादव के साथ कभी उनका 36 का आंकड़ा हुआ करता था। आनंद मोहन यह तो कबूलते हैं कि लालू यादव से उनकी राजनीतिक लड़ाई रही लेकिन साथ ही साथ यह बताना नहीं भूलते कि अब उनका बेटा चेतन आनंद लालू की पार्टी से ही विधायक है।


आपको बताते हैं कि आनंद मोहन की रिहाई को लेकर तमाम राजनीतिक दलों की तरफ से मांग उठी है। एनडीए में शामिल घटक दल से लेकर महागठबंधन के अंदर से भी आवाज उठ रही है कि आनंद मोहन को अब जेल से रिहा होना चाहिए। देखना होगा कि बदले दौर की राजनीति में आनंद मोहन के लिए जेल से बाहर आने का रास्ता बन पाता है या फिर इसमें अभी और ज्यादा वक्त लगता है लेकिन फिलहाल आनंद मोहन एक बार फिर जेल के अंदर हैं और पिछले 15 दिनों में जो वक्त उन्होंने परिवार और बिहार की राजनीति के साथ गुजारा है उसकी यादें वह अपने साथ लेकर गए हैं।