जनता दरबार के नाम पर चल रहा खेल, अजित शर्मा बोले.. अधिकारियों पर नकेल कसने में नीतीश फेल

जनता दरबार के नाम पर चल रहा खेल, अजित शर्मा बोले.. अधिकारियों पर नकेल कसने में नीतीश फेल

PATNA : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 5 साल के अंतराल के बाद जनता दरबार कार्यक्रम का सिलसिला शुरू किया है। पिछले कुछ अरसे से नीतीश कुमार एक बार फिर जनता दरबार कार्यक्रम में मौजूद रहकर फरियादियों से मुलाकात कर रहे हैं। इस दौरान उनके सामने ढेरों शिकायतें भी आ रही हैं लेकिन जनता दरबार का फॉर्मेट अब पहले से बदला हुआ है। नीतीश कुमार के जनता दरबार कार्यक्रम के नए फॉर्मेट को लेकर कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजीत शर्मा ने अब सवाल खड़ा कर दिया है। कांग्रेस के विधायक अजीत शर्मा ने आरोप लगाया है कि जनता दरबार के नाम पर सरकार बड़ा खेल कर रही है।


जनता दरबार के बदले हुए फॉर्मेट में अब नीतीश कुमार के सामने जिन्हें शिकायत दर्ज करानी होती है उन्हें जिले में आवेदन करना होता है। जिला प्रशासन लोगों को चिन्हित कर उन्हें अपने खर्च पर पटना लाता है। पटना में रहने खाने का इंतजाम भी जिला प्रशासन की तरफ से किया जाता है। सरकारी पैसे पर फरियादी पटना पहुंचते हैं और फिर नीतीश कुमार के सामने अपनी बात रखते हैं। इसके बाद नीतीश कुमार उस पर कार्रवाई के लिए आवश्यक के दिशा निर्देश देते हैं। इस पूरी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस विधायक दल के नेता अजीत शर्मा ने सवाल खड़ा किया है। अजीत शर्मा ने कहा है कि मुख्यमंत्री के जनता दरबार कार्यक्रम में जो मामले आते हैं उनमें से 99 फ़ीसदी अधिकारियों के गलत रवैया और कानून का पालन नहीं करने के कारण पैदा होते हैं। फरियादों को पटना लाने और वापस पहुंचाने के लिए सरकारी पैसे खर्च किए जा रहे हैं। अजीत शर्मा ने कहा है कि सरकार को यह पहल करनी चाहिए कि जिस अधिकारी की वजह से फरियादी को पटना जाना पड़ता है। उस अधिकारी के वेतन भत्ते से खर्च की भरपाई हो साथ ही साथ काम में लापरवाही बरतने के लिए अधिकारी के ऊपर कार्रवाई भी की जानी चाहिए।


अजीत शर्मा ने आरोप लगाया है कि बिहार में अफसरशाही इतनी बेलगाम हो चुकी है कि खुद इस पर नकेल कसने में नीतीश कुमार असफल साबित हो रहे हैं। नीतीश कुमार के जनता दरबार कार्यक्रम में लगातार अधिकारियों से जुड़ी शिकायतें पहुंच रही हैं लेकिन अब वह भी इसके आदि हो चुके हैं। अजीत शर्मा ने कहा है कि जब तक के बिहार में कानून का पालन नहीं होगा अधिकारी अपना रवैया नहीं सुधारेंगे तब तक सुशासन नहीं लाया जा सकता। नीतीश कुमार के जनता दरबार कार्यक्रम का मौजूदा फॉर्मेट केवल नौटंकी है, इसके अलावा और कुछ भी नहीं।