1st Bihar Published by: Updated Jun 12, 2020, 7:31:37 AM
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PATNA : पटना के दीघा और राजीव नगर इलाके में सरकारी जमीन का खेल अब बिहार राज्य आवास बोर्ड और बिहार राज्य हाउसिंग कोऑपरेटिव फेडरेशन के बीच टकराव में बदल गया है। आवास बोर्ड के कार्यपालक अभियंता में फेडरेशन के अध्यक्ष विजय सिंह और सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी मानवेंद्र कुमार सिंह पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया है। दीघा कैंप में पोस्टेड कार्यपालक अभियंता प्रकाश चंद्र राजू ने कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। राजू का आरोप है कि बिहार राज्य हाउसिंग कोऑपरेटिव फेडरेशन के सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी मानवेंद्र कुमार सिंह और अध्यक्ष विजय सिंह ने उन्हें धोखे में रखते हुए गलत दस्तावेज पर हस्ताक्षर लिए और उससे बाद में सिटी एसपी के यहां जमा करा दिया।
दरअसल यह सारा विवाद 4 मई को चंद्र विहार कॉलोनी में एक जमीन पर कब्जा हटाने के मामले से शुरू हुआ है। इस जमीन से कब्जा हटाने के लिए फेडरेशन के अधिकारी गए थे। इस दौरान स्थानीय लोगों से फेडरेशन के अधिकारियों की भिड़ंत हुई थी। इस विवाद के बाद फेडरेशन और स्थानीय लोगों की तरफ से राजीव नगर थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। मामला थाने में पहुंचने के बाद कार्यपालक अभियंता का कहना है कि फेडरेशन के पास ये अधिकार नहीं है कि वह खाने में अतिक्रमणकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कराएं। बोर्ड ही इस मामले में कंप्लेन दर्ज करा सकता है क्योंकि चंद्र विहार कॉलोनी की जमीन बोर्ड के पास है। इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि फेडरेशन के अधिकारी पिछले कुछ वक्त से लगातार राजीव नगर और दीघा इलाके में अपनी सक्रियता बनाए हुए हैं। विजय सिंह के नेतृत्व में लगातार राजीव नगर इलाके में अतिक्रमण के मामलों को लेकर स्थानीय लोगों से टकराव की स्थिति बनी हुई है।
दीघा और राजीव नगर इलाके में आवास बोर्ड की जमीन का विवाद साल पुराना है। आवास बोर्ड में दीघा की 1024.52 एकड़ जमीन का अधिग्रहण 1974 से शुरू किया था जो दो 1983 तक हुआ। इस जमीन में से 23 एकड़ का भूखंड बिहार स्टेट हाउसिंग फेडरेशन ने 1982 में किसानों से अलग-अलग सेल डीड के माध्यम से खरीदा और पटना में इसकी रजिस्ट्री हुई। बोर्ड ने सरकारी जमीन का अधिग्रहण कर 1982 में मुआवजे के तकरीबन 8.50 करोड़ की रकम समाहरणालय में जमा करा कर दी। 1983 में कागजी दखल कब्जा पत्र हासिल कर लिया था। इस दौरान न्यायालय ने अलग-अलग मामलों में सुनवाई के दौरान 1024.52 एकड़ जमीन के अधिग्रहण पर मुहर लगाई। साल 2011 में बिहार सरकार ने फेडरेशन को भंग कर दिया था इसके बाद उसकी तरफ से खरीदी गई 23 एकड़ जमीन को भूमाफिया उन्हें अपने किसानों के माध्यम से दोबारा खरीद बिक्री किया। अब इस जमीन पर सैकड़ों की तादाद में मकान बन चुके हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद 2019 में फेडरेशन को पुनः बहाल किया गया और अब एक बार फिर आवास बोर्ड और फेडरेशन के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।