बीजेपी नेता विशेश्वर ओझा हत्याकांड: ब्रजेश मिश्रा के खिलाफ आरोप गठित, 19 अप्रैल को सजा के बिंदु पर सुनवाई

बीजेपी नेता विशेश्वर ओझा हत्याकांड: ब्रजेश मिश्रा के खिलाफ आरोप गठित, 19 अप्रैल को सजा के बिंदु पर सुनवाई

ARRAH : आरा के बहुचर्चित विशेश्वर ओझा हत्याकांड मामले में आरा की एडीजे 8 की अदालत में मंगलवार को सजा की बिंदु पर सुनवाई निर्धारित थी। लेकिन न तो सजा की बिंदु पर आज सुनवाई हो सकी और न ही सजा का ऐलान ही हो सका। इसकी मुख्य वजह थी कि इस हत्याकांड के मुख्य अभियुक्त ब्रजेश मिश्रा के खिलाफ इसके पूर्व भी एक अन्य मामले में आरोप सिद्ध हो चुका है। उसे एडीजे 2 की अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सजा का ऐलान किया जा चुका है। 


जिला अभियोजन पदाधिकारी सह अपर लोक अभियोजक माणिक कुमार सिंह ने आज अदालत में सीआरपीसी की धारा 211(7) के तहत कन्विक्शन वारंट को न्यायालय में प्रस्तुत किया तथा उसे प्रदर्श के रूप में दर्ज कराया। इसके बाद चार्ज की बिंदु पर सुनवाई शुरू हुई। इस बीच बचाव पक्ष ने अभियोजन की इस कार्रवाई का अदालत में जमकर विरोध किया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने इस प्रक्रिया को गैरजरूरी बताया। लेकिन अदालत ने अभियोजन की दलीलों को स्वीकार करते हुए चार्ज की बिंदु पर सुनवाई की। मामले में आगामी 19 अप्रैल को सजा की बिंदु पर सुनवाई के लिए निर्धारित किया गया है।


जिला अभियोजन पदाधिकारी सह अपर लोक अभियोजक माणिक कुमार सिंह ने बताया कि बचाव पक्ष का तर्क कानून सम्मत नहीं था इसलिए उनका तर्क खारिज हुआ और अभियोजन पक्ष की दलील माननीय न्यायालय ने स्वीकार करते हुए कंभिक्शन वारंट को प्रदर्श के तौर पर अंकित करते हुए चार्ज के बिंदु पर आज सुनवाई पूरी कर ली एवं आज ही कंभिक्शन वारंट के आधार पर आरोप का गठन हुआ। अगली तिथि पर सजा के बिंदु पर सुनवाई एवं सजा सुनाए जाने की संभावना है। अभियोजन पदाधिकारी माणिक कुमार सिंह ने बताया कि विशेश्वर ओझा हत्याकांड में चश्मदीद गवाह की हत्या के मामले में ब्रजेश मिश्रा आजीवन सश्रम कारावास की सजा काट रहा है। उसी से संबंधित साक्ष्य (कन्विक्शन वारंट) बक्सर जेल से मंगाया गया एवं न्यायालय के समक्ष प्रदर्श के रूप में अंकित कराया गया है।


बता दें कि भाजपा के तत्कालीन प्रदेश उपाध्यक्ष विशेश्वर ओझा को गोलियों से भून डाला गया था।  आरा की एडीजे-8 की कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए अभियुक्त ब्रजेश मिश्रा और हरेश मिश्रा समेत सात लोगों को दोषी ठहराया है। वहीं, साक्ष्य के अभाव में छह को दोषमुक्त भी कर दिया गया है। ब्रजेश मिश्रा और हरेश मिश्रा दोनों सगे भाई हैं। कोर्ट ने उन्हें इस हत्याकांड को अंजाम देने वाला करार दिया है। कोर्ट ने हरेश मिश्रा और उसके भाई ब्रजेश मिश्रा को हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के मामले का दोषी पाया है। वहीं, उमाकांत, टुनी, बसंत, पप्पू औ हरेन्द्र सिंह को 307 आईपीसी एवं 27 आर्म्स एक्ट में दोषी पाया गया है। कोर्ट ने इस कांड में आरोपी बनाये गए कुंदन, संतोष, विनोद, भृगु, मदन, बबलू को संदेह का लाभ देते हुए इन सभी 6 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया है। 


क्या है पूरा मामला?

यह मामला 8 साल पुराना है। 12 फरवरी, 2016 की शाम विशेश्वर ओझा अपनी सफारी गाड़ी से ड्राइवर राकेश कुमार ओझा और चार अन्य समर्थकों के साथ बभनौली निवासी चंदेश्वर उपाध्याय के भतीजे की बारात में सम्मिलित होने परसोंडा टोला स्थित मृत्युंजय मिश्रा के यहां आए थे। वहां से एक दूसरी गाड़ी उनके काफिले में शामिल हो गई। विशेश्वर ओझा के घर लौटने के दौरान सोनबरसा मैदान में मिश्रा बंधुओ ने अपने सहयोगियों के साथ उनकी गाड़ी को रोक लिया और ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इस फायरिंग में विशेश्वर ओझा एवं उनके ड्राइवर राकेश कुमार ओझा को गोली लगी थी। अस्पताल ले पहुँचने पर डॉक्टरों ने विशेश्वर ओझा को मृत घोषित कर दिया था।


घटना के बाद मचा था सियासी तूफान

विशेश्वर ओझा की हत्या से  प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया था। विशेश्वर ओझा भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष थे। इस कांड में राजनाथ ओझा के बयान पर शाहपुर थाना कांड संख्या- 48/2016 अंकित किया गया था। जिसमें कुल सात नामजद एवं तीन-चार अन्य अज्ञात का  जिक्र किया गया था। पुलिस ने अपनी जांच के बाद कुल 13 अभियुक्त के विरुद्ध न्यायालय में 2आरोप पत्र समर्पित किये थे।


तीन चिकित्सकों की हुई गवाही

इस मामले के ट्रायल में शहर के तीन नामी चिकित्सकों की गवाही अभियोजन ने कराई। जिला अभियोजन पदाधिकारी सह अपर लोक अभियोजक माणिक कुमार सिंह ने बताया कि डॉक्टर कृपा शंकर चौबे की अध्यक्षता में एक तीन सदस्य मेडिकल टीम का गठन पोस्टमार्टम कराने के लिए किया गया था। जिस टीम ने पोस्टमार्टम किया था, उस टीम का नेतृत्व करने वाले डॉक्टर कृपा शंकर चौबे का इस कांड में साक्ष्य परीक्षण कराया गया। इसके अलावा शहर के विख्यात चिकित्सक डॉ. विकास सिंह की भी गवाही करायी गयी। जिनके यहां गोलियां निकाली गई थी। शाहपुर रेफरल अस्पताल में विशेश्वर ओझा का प्रथम इलाज करने वाले डॉक्टर रमाशंकर चौबे की भी इस कांड में गवाही करवाई गई। डॉ. रमाशंकर चौबे ने विशेश्वर ओझा के ड्राइवर रमाशंकर ओझा का इलाज भी किया था, जिसकी गोलियां निकल गई थी और इस संबंध में भी चिकित्सकों ने अपने साक्ष्य परीक्षण में जिक्र किया था। 


10 लोगों ने दी गवाही

विशेश्वर ओझा हत्याकांड में कुल 10 गवाह की गवाही अभियोजन की ओर से कराई गई। इसमें चार प्रत्यक्षदर्शी, तीन चिकित्सक, एक जांच अधिकारी, दो स्वतंत्र जब्ती सूची गवाह शामिल हैं।


मुख्य गवाह कमल किशोर मिश्रा की हत्या 

इस कांड में मुख्य साजिशकर्ता और अभियुक्त ब्रजेश मिश्रा के मामले के ट्रायल के दौरान गवाही से पहले ही मुख्य गवाह और चश्मदीद कमल किशोर मिश्रा की हत्या 28 सितंबर, 2018 को कर दी गई थी। बाद में जिला अभियोजन पदाधिकारी माणिक कुमार सिंह ने ट्रायल के दौरान कमल किशोर मिश्रा की गवाही और प्रति परीक्षण को उनकी हत्या के उपरांत प्रदर्श के रूप में अंकित कराया गया।  जिसे न्यायालय ने बहस के दौरान साक्ष्य परीक्षण के तौर पर स्वीकार कर लिया और उसी के आधार पर आज यह फैसला सुनाया है। 


मुख्य गवाह हत्याकांड में मिश्रा बंधुओं को हुई है आजीवन कारावास

जिला अभियोजन पदाधिकारी सह अपर लोक अभियोजक माणिक कुमार सिंह ने बताया कि मुख्य गवाह कमल किशोर मिश्रा की हत्या के मामले में मिश्रा बंधु  ब्रजेश मिश्रा और उसका एक भाई के साथ-साथ उसके सहयोगी दोष साबित हो चुके हैं। एडीजे -2 अखिलेश सिंह की अदालत ने पिछले महीने ही उन सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।