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बिहार कांग्रेस में भारी नाराजगी, सरकार में शामिल होना आत्मघाती साबित हो सकता है

1st Bihar Published by: Updated Aug 16, 2022, 7:52:51 AM

बिहार कांग्रेस में भारी नाराजगी, सरकार में शामिल होना आत्मघाती साबित हो सकता है

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PATNA : साल 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद महागठबंधन के अंदर हार का ठीकरा कांग्रेस के ऊपर फूटा था. तेजस्वी यादव जब मुख्यमंत्री की कुर्सी से दूर रह गए थे तब आरजेडी के नेताओं ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस ने उम्मीदवारों के चयन में भारी गलती की. साथ ही जनाधार से ज्यादा सीटों की डिमांड को लेकर भी आरजेडी के निशाने पर कांग्रेस रही, लेकिन अब जबकि कांग्रेस से बिहार में सत्ताधारी दल बन गई है तो उसके ऊपर सबसे बड़ा संकट मंडरा रहा है. दरअसल नीतीश कैबिनेट में आज कांग्रेस कोटे से दो मंत्री शपथ लेने जा रहे हैं. कांग्रेस ने मुरारी गौतम और अफाक आलम को मंत्री बनाने का फैसला किया है. अगले कैबिनेट विस्तार में तीसरे चेहरे की एंट्री कराई जाएगी.



कांग्रेस ने बिहार में किसी भी अगड़ी जाति के चेहरे पर कोई भरोसा नहीं दिखाया है. मुरारी गौतम दलित समाज से आते हैं, जबकि अल्पसंख्यक चेहरे के तौर पर अफाक आलम को मंत्री बनाया जा रहा है. मंत्री पद को लेकर कांग्रेस में जो मारामारी मची है. उसके बीच भक्त चरण दास का विरोध हो रहा है. सदाकत आश्रम में सोमवार को भारी विरोध देखने को मिला था. हंगामे के बीच कांग्रेस के दावेदार जो मंत्री बनने से चूक गए हैं, अब उनके समर्थकों में भारी नाराजगी है प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा से लेकर विधायक दल के नेता अजीत शर्मा तक के दावेदार बताए जा रहे थे. अल्पसंख्यक के चेहरे के तौर पर शकील अहमद खान का नाम भी चर्चा में था, लेकिन सबको निराशा झेलनी पड़ी. भक्त चरण दास ने जो दांव खेला उसके सामने कांग्रेस के मौजूदा दिग्गज धराशाई हो गए.



लेकिन अब कांग्रेस के अंदर से जो जानकारियां आ रही हैं, उसके बाद ऐसा लगता है कि सरकार में शामिल होना पार्टी के लिए बिहार में आत्मघाती साबित तो हो सकता है. कांग्रेस नेतृत्व के फैसले और भक्त चरण दास के दांव को लेकर अब पार्टी के अंदर विधायकों में भारी नाराजगी है. कांग्रेस के फिलहाल 19 विधायक हैं और ज्यादातर विधायक या यूं कहें कि उन विधायकों को छोड़कर जो मंत्री बन रहे हैं. बाकी के अंदर भारी नाराजगी है. भारतीय जनता पार्टी आने वाले वक्त में इस नाराजगी को बना सकती है. कांग्रेस के अंदर अगर नाराजगी बढ़ती है तो दूसरे राज्यों की तर्ज पर बिहार में भी पार्टी के विधायक नेतृत्व से अलग जा सकते हैं.