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तो क्या बेउर में लिखी जाएगी नई सियासी पटकथा? नीतीश से खार खाये दो पुराने दुश्मनों पर टिकी नजरें

PATNA : बेउर जेल का डिवीजन वार्ड रविवार से एकबार फिर सुर्खियों में है। डिवीजन वार्ड का नाम लोगों की जुबान पर तब आया जब बाहुबली विधायक अनंत सिंह को इसमें शिफ्ट किया गया। जेल में पहले स

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PATNA : बेउर जेल का डिवीजन वार्ड रविवार से एकबार फिर सुर्खियों में है। डिवीजन वार्ड का नाम लोगों की जुबान पर तब आया जब बाहुबली विधायक अनंत सिंह को इसमें शिफ्ट किया गया। जेल में पहले से बंद आरजेडी के पूर्व विधायक राजबल्लभ यादव और पूर्व सांसद विजय कृष्ण का ख्याल सबको तब आया जब अनंत सिंह डिवीजन वार्ड में पहुंचे। राजबल्लभ यादव से अनंत सिंह के रिश्ते बुरे नहीं। पिछले लोकसभा चुनाव में भी अनंत सिंह ने नवादा जाकर राजबल्लभ यादव की पत्नी के लिए चुनाव प्रचार भी किया। लेकिन विजय कृष्ण और अनंत सिंह के बीच आंकड़ा छत्तीस का रहा है। विजय कृष्ण के साथ हाथ मिलाएंगे अनंत? अनंत सिंह और विजय कृष्ण एक ही इलाके से राजनीति करते रहे हैं। दोनों कभी न कभी नीतीश कुमार के करीबी भी रह चुके हैं लेकिन आज दोनों नीतीश से दूर हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या नीतीश कुमार के खिलाफ यह दोनों हाथ मिला सकते हैं? अगर ऐसा हुआ तो बेऊर में नई सियासी पटकथा लिखी जाएगी। अनंत सिंह नीतीश सरकार से खार खाए बैठे हैं जबकि हत्या के मामले में दोषी विजय कृष्ण का पॉलिटिकल कैरियर खत्म हो चुका है। ऐसे में अगर दोनों साथ आए तो बाढ़ और मोकामा के इलाके में नए सियासी समीकरण बनना तय है। दोनों के बीच पुरानी अदावत अनंत और विजय कृष्ण के बीच पुरानी अदावत रही है। लेकिन खास बात यह है कि दोनों के बीच तल्खी की धुरी नीतीश कुमार ही रहे हैं। विजय कृष्ण कभी नीतीश कुमार के सबसे करीबी दोस्त हुआ करते थे, तो कभी अनंत सिंह उनके छोटे सरकार। लेकिन आज वक्त बदल चुका है और दोनों नीतीश कुमार से बहुत दूर जा चुके हैं। साल 2004 के लोकसभा चुनाव में बाढ़ लोकसभा सीट पर नीतीश कुमार को विजय कृष्ण के हाथों हार का सामना करना पड़ा था तब अनंत सिंह नीतीश कुमार के साथ खड़े थे। आज अनंत और विजय कृष्ण जेल के एक ही वार्ड में बंदी हैं। ऐसे में अगर उनकी पुरानी दुश्मनी नज़दीकियों में बदल जाती है तो बाढ़ और टाल की सियासत नई करवट ले सकती है।
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