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Life Style: आम की दीवानगी पड़ सकती है भारी, जानलेवा है यह खतरनाक केमिकल; खूब हो रहा इस्तेमाल

Life Style: गर्मी का मौसम और आम इन दोनों का रिश्ता बेहद खास होता है. कोई आम की चटनी का दीवाना होता है, तो कोई चूसने वाले रसदार आमों का दिवाना होता है. पर क्या आपने कभी सोचा है कि आम फायदेमंद के साथ कितना हानिकारक भी है. जानें...

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Viveka Nand
3 मिनट

Life Style: गर्मी का मौसम और आम इन दोनों का रिश्ता बेहद खास होता है। जैसे ही आम बाजार में आते हैं, बच्चों से लेकर बड़ों तक के चेहरे पर मुस्कान बिखर जाती है। कोई आम की चटनी का दीवाना होता है, तो कोई चूसने वाले रसदार आमों का। पर क्या आपने कभी सोचा है कि जो आम आप इतने चाव से खा रहे हैं, वो कहीं आपकी सेहत के लिए ज़हर तो नहीं बन रहा?


आजकल बाजार में मिलने वाले अधिकतर आमों की सुंदरता और जल्दी पकने का राज पेड़ नहीं, बल्कि एक खतरनाक रसायन "कैल्शियम कार्बाइड" है, जो प्राकृतिक प्रक्रिया को दरकिनार कर फलों को अस्वाभाविक रूप से जल्दी पकाने के लिए उपयोग किया जा रहा है। कैल्शियम कार्बाइड एक तेज़ रासायनिक यौगिक है, जिसका प्रयोग आमतौर पर औद्योगिक कामों के लिए होता है। लेकिन फलों को पकाने के लिए इसका इस्तेमाल करना पूरी तरह प्रतिबंधित है क्योंकि इससे निकलने वाली गैस (एसीटिलीन) न केवल फलों की गुणवत्ता को घटा देती है, बल्कि मानव शरीर पर गंभीर असर डाल सकती है।


इस रसायन से पकाए गए आम बाहर से देखने में बेहद चमकदार और परिपक्व लगते हैं, लेकिन अंदर से वे पोषण विहीन और हानिकारक हो सकते हैं। इससे पके आम का सेवन करने से एसिडिटी, पेट दर्द, उल्टी, डायरिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक इसका सेवन करने से नर्वस सिस्टम प्रभावित हो सकता है और यह गर्भवती महिलाओं तथा शिशुओं के लिए भी बेहद खतरनाक सिद्ध हो सकता है।


आम का रंग बहुत अधिक पीला और अस्वाभाविक रूप से चमकदार होता है। उसमें किसी प्रकार की सुगंध नहीं होती, जबकि प्राकृतिक आम से हल्की मीठी खुशबू आती है। छूने पर आम अत्यधिक नरम लग सकता है और स्वाद भी कृत्रिम या फीका हो सकता है।


घर पर प्राकृतिक तरीके से पकाएं कच्चे आम को अखबार में लपेटकर 2–3 दिनों के लिए घर में रखें। यह धीरे-धीरे बिना किसी रसायन के सुरक्षित रूप से पक जाएगा। वहीं, अगर बाजार से ला रहे है, तो आमों को कम से कम 1 घंटे तक ठंडे पानी में भिगोकर रखें। इससे आम पर लगे रसायन या कीटनाशकों का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है।


जहां तक हो सके, स्थानीय किसान बाजारों या ऑर्गेनिक स्टोर्स से आम खरीदें, जो बिना केमिकल के प्राकृतिक तरीके से पके होते हैं। फलों के विक्रेता का FSSAI रजिस्ट्रेशन हो तो अधिक सुरक्षित माना जाता है। सावधानी में ही समझदारी है। आम जरूर खाएं, लेकिन आंख मूंदकर नहीं। स्वाद की चाह में अगर स्वास्थ्य से समझौता किया, तो यह गर्मी की मिठास कड़वे अनुभव में बदल सकती है। इसलिए जब भी अगली बार आम खरीदें, उसकी मिठास के साथ उसकी सच्चाई भी परखें।